चाणक्य के 75 अनमोल वचन | Chanakya Quotes in Hindi

चाणक्य के अनमोल विचार Chanakya Quotes in Hindi   कौन थे चाणक्य? चाणक्य, मौर्य वंश के महान सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य के महामंत्री थे और तक्षशिला के निवासी थे| वह ‘कौटिल्य’ के नाम से भी प्रसिद्ध है| चाणक्य ने ही नंद वंश का नाश करके चंद्रगुप्त मौर्य को राजा बनाया था| अर्थशास्त्र, राजनीति, कृषि और समाज नीति आदि में चाणक्य का बहुत बड़ा योगदान है| एक साधारण युवक(चंद्रगुप्त मौर्य) को राजा बना देने की शक्ति केवल चाणक्य के पास ही थी| मौर्य साम्राज्य के संस्थापक के रूप में महापंडित विष्णुगुप्त चाणक्य को…

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जैसे को तैसा

जैसे को तैसा     एक बार तेनालीराम का कुत्ता बीमार पड़ गया और बीमारी के कारण एक दिन चल बसा| कुत्ते के मर जाने के बाद तेनालीराम स्वयं बीमार पड़ गया| उसे बहुत तेज बुखार ने घेर लिया| एक पंडित जी उसके घर पर आकर बोले:-” तुम्हें अपने पाप का प्रायश्चित करना चाहिए|हो सकता है तुम्हारे पापों की वजह से तुम्हें इस रोग से छुटकारा ना मिले|” तेनालीराम ने पूछा:-” मुझे क्या करना होगा?” तेनालीराम के किस्से:- सांप भी मर जाए और लाठी भी ना टूटे सोने की मोहरे…

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आत्म संतोषी ब्राह्मण

आत्म संतोषी ब्राह्मण एक बार तेनालीराम से राजा कृष्णदेव राय बोले:-” तुम्हारे पास काफी धन हो गया है| धनी मनुष्य को दान करते रहना चाहिए इससे धन और बढ़ता है| जो व्यक्ति दूसरों के लिए कुछ नहीं करता वह भी कोई मनुष्य कहलाने योग्य है? तुम किसी ब्राह्मण को एक मकान ही दान में दे दो| ‘जैसी महाराज की इच्छा’ तेनालीराम ने कहा| तेनालीराम ने एक छोटा सुंदर सा मकान बनवाया जिसके चारों ओर फूलों का एक बगीचा था| मकान के मुख्य द्वार पर एक तख्ती टांग दी, जिस पर…

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पाताल का राजा

पाताल का राजा एक बार महाराज कृष्णदेव राय ने तेनालीराम से किसी विचित्र जगह पर घूमने की इच्छा प्रकट की| तेनालीराम बोले:-” महाराज! मैं आपको ऐसी जगह पर घुमा कर लाऊंगा, जहां आप आज तक कभी नहीं गए होंगे| आपने उस जगह के बारे में किसी से सुना भी नहीं होगा|” कृष्णदेवराय, तेनालीराम की बातें सुनकर हैरान रह गए और उनकी उत्सुकता और बढ़ गई| उन्होंने तेनालीराम से ऐसी जगह तुरंत ही चलने का आग्रह किया| एक दिन शुभ मुहूर्त में राजा कृष्णदेव राय अपनी सेना सहित तेनालीराम के साथ…

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मखमल की जूती | राजा कृष्णदेव राय और तेनालीराम

मखमल की जूती एक दिन महाराज कृष्णदेव राय (Krishna Dev Rai) का दरबार लगा हुआ था| महाराज और तेनालीराम में इस बात पर बहस छिड़ गई कि आमतौर पर लोग किसी भी बात पर जल्दी से विश्वास कर लेते हैं या नहीं| तेनालीराम का विचार था कि यदि विश्वास दिलाने वाला व्यक्ति समझदार हो तो लोग किसी भी बात पर विश्वास कर लेते हैं| राजा का मानना था कि लोगों को आसानी से मूर्ख नहीं बनाया जा सकता|     तेनालीराम ने कहा:-” मैं असंभव से असंभव कार्य को भी करवा सकता…

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गुलाब का फूल

गुलाब का फूल तेनालीराम की धर्मपत्नी को गुलाब बहुत पसंद थे| वह अपने पुत्र को भेजकर राजा के बगीचे से एक गुलाब का फूल मंगवाया करती थी| इस बात का पता तेनालीराम को नहीं था| दरबार में तेनालीराम से ईर्ष्या करने वालों की कमी नहीं थी| उन्हें किसी प्रकार इस बात का पता चल गया था कि तेनालीराम की पत्नी चोरी-छुपे गुलाब का एक फूल प्रतिदिन अपने पुत्र से मंगवाती है, लेकिन तेनालीराम के विरुद्ध राजा से शिकायत करने की उनमें हिम्मत नहीं थी| उन्होंने सोचा कि तेनालीराम के पुत्र…

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तेनालीराम का दूसरा जन्म

तेनालीराम का दूसरा जन्म एक बार अचानक महाराज के दिमाग में न जाने क्या बात आ गई कि वह संगीत में रुचि लेने लगे| देश के प्रसिद्ध संगीतकार उनके पास आने लगे| वे संगीत की दुनिया में इतने लिप्त हो गए कि उन्होंने राज्य की ओर ध्यान देना ही छोड़ दिया और तो और उन्होंने दरबार में भी जाना छोड़ दिया था| इसका परिणाम यह हुआ कि मंत्री अपनी मनमानी करने लगे| वह प्रजा को तंग करने लगे प्रजा से मनमाने ढंग से कर वसूलने लगे| इससे प्रजा में महाराज…

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दान का मूल्य

दान का मूल्य Tenali Raman Kahani     राजा कृष्णदेव राय का दरबार लगा हुआ था| राज्य की भलाई एवं समृद्धि के लिए सबसे अधिक महत्वपूर्ण व्यक्ति कौन होता है, इस पर बहस हो रही थी| सभी दरबारी अपने अपने विचार प्रकट कर रहे थे| एक दरबारी ने अपनी राय जाहिर की कि ‘राज्य की समृद्धि वहां के राजा पर निर्भर करती है’| इस पर राजा ने अपनी राय प्रकट की:-“राज्य की समृद्धि के लिए राजा तो जिम्मेदार होता ही है, पर इस बात का क्या भरोसा कि राजा दुष्ट…

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मिट्टी के तरबूज Mitti Ke Tarbooz

मिट्टी के तरबूज – Mitti Ke Tarbooz   गर्मी का मौसम समाप्त हो चुका था| महाराज कृष्णदेव राय का दरबार लगा हुआ था| अचानक उन्होंने देखा कि उनका बचपन का सबसे प्रिय मित्र आ रहा है| राजा ने अपने मित्र को गले लगा कर खुशी जाहिर की और उन्हें अपने निजी कक्ष में ठहराया| मित्र की दृष्टि दीवार पर बने एक चित्र पर गई| चित्र में दो तरबूज बने हुए थे| वह सोचने लगा कि इतने सुंदर तरबूज (Tarbooz) तो मैंने कई वर्षों से नहीं देखे हैं, यदि ऐसे तरबूज खाने…

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कड़वा नीम

कड़वा नीम   एक बार विजयनगर के पड़ोसी राज्य ने विजयनगर पर आक्रमण कर दिया| इस युद्ध में विजय नगर के महाराज कृष्णदेव राय की विजय हुई| कृष्णदेव राय जब अपनी राजधानी पहुंचे तो तेलानीराम (Tenali Raman)रास्ते में ही पीछे रह गए| अगले दिन प्रत्येक दरबारी इस युद्ध को जीतने की खुशी में महाराज कृष्णदेव राय को अपनी तरफ से कुछ न कुछ उपहार दे रहे थे| इतने में तेनालीराम द्वारा भेजे गए एक आदमी ने राजा को नीम का पौधा भेंट किया तथा बताया कि यह उपहार आपके लिए…

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