राजा गोपीचंद को मां की शिक्षा | Raja Gopichand Story

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राजा गोपीचंद को मां की शिक्षा

 

raja gopichand

Raja Gopichand Story in Hindi

राजा गोपीचंद (Raja Gopichand), दुनिया की ऐशो-आराम छोड़ कर गुरु गोरखनाथ के पास जाकर योगी बनने के लिए चले गए| गुरु गोरखनाथ ने गोपीचंद को योग की दीक्षा दे दी मगर गुरु गोरखनाथ यह सोचने लगे कि यह एक राजा है| इसके अंदर लोक-लाज है जो कि परमार्थ में बड़ी भारी दीवार है, जिसे दूर करना जरूरी है|

इसलिए गुरु गोरखनाथ ने उन्हें हुक्म दिया:-” बच्चा! जैसा मैं तुझे कहूं वैसा करो| साधु का वेश धारण करके हाथ में कमंडल लेकर वापस अपने राज्य में भिक्षा के लिए जाओ और जो कुछ तुम्हारी प्रजा से मिले, ले आओ”|

गोपीचंद  ने श्रद्धा पूर्वक अपने गुरु का आदेश माना| जब गोपीचंद (Raja Gopichand) शहर में गए तो लोगों ने देखा कि यह तो राजा है| जिसके पास पैसे थे, उन्होंने रुपये-पैसे दे दिए, जिनके पास कपड़े और गहने थे उन्होंने सब उतार कर गोपीचंद को दे दिए| गोपीचंद यह सब लेकर अपने साथी योगियों को देता गया और वे ये सब वस्तुएं लेकर अपने गुरु के पास भेजते रहें|

अंत में गोपीचंद (Raja Gopichand) ने मां के दरवाजे पर जाकर अलख जगाई| मां ने उसे देख कर कहा:-” योगी! मैं गृहस्थ औरत हूं और तू एक त्यागी पुरुष है| गृहस्थ का धर्म नहीं है कि एक त्यागी को उपदेश दे| लेकिन इस समय तू मेरे दरवाजे पर मांगने आया है, तो मुझे अधिकार है कि मैं जो भी चाहूं तुम्हें भिक्षा में दूं| जो कुछ तुम मांग कर लाया है| यह तो सब योगी लोग खा जाएंगे| तेरे पास तो कुछ भी नहीं रहेगा| इसलिए मैं तुझे ऐसी भिक्षा नहीं देती, लेकिन 3 बातों की भिक्षा जरूर देना चाहती हूं”-

हली यह कि रात को मजबूत से मजबूत किले में रहना

दूसरी यह कि स्वादिष्ट से स्वादिष्ट भोजन खाना और

तीसरी यह कि नरम से नरम बिस्तर पर सोना|

यह सुनकर योगी बोला:-” मां! तेरे उपदेश से ही मैं साधु बना हूं, लेकिन अब तुम मुझे उल्टा उपदेश क्यों दे रही है| अगर कोई और स्त्री यह कहती तो मैं उसे समझाता|” देखो मां, जंगल में मजबूत किले और स्वादिष्ट भोजन कहां मिलेगा? इसी तरह नरम बिस्तर नहीं मिलेंगे वहां तो रूखे सूखे टुकड़े खाने पड़ते हैं और घास पर लेटना पड़ता है|

मां ने कहा:-” योगी तूने मेरा मतलब नहीं समझा”| मेरा कहने का यह मतलब है कि तू दिन रात जागना, अभ्यास करना| जिस वक्त तुझे गहरी नींद आए और तुम गिरने लगो तो बस वही सो जाना, चाहे नीचे कांटे हो या कंकर| वही तुम्हारे लिए नरम बिछौना होगा| तुम्हें ऐसी नींद आएगी जैसे कभी फूलों की सेज पर भी नहीं आई होगी और जहां तक हो सके थोड़ा खाना और भूखे रहना|

जब भूख से प्राण तड़प उठे और प्राण निकलने लगे तो रूखा-सूखा रोटी का टुकड़ा खा लेना| उस वक्त 7 दिनों का सूखा टुकड़ा भी तुझे हलवे और पुलाव से बढ़कर स्वादिष्ट लगेगा| तीसरी बात यह है कि तू राज्य छोड़कर योगी हुआ है| तेरे पास जवान स्त्रियों को भी आना है, वृद्ध और कम अवस्था की स्त्रियों को भी आना है इसलिए गुरु की संगति में रहना क्योंकि गुरु की संगति से बढ़कर कोई और मजबूत किला नहीं है| बस मैं तुझे इन 3 बातों की दीक्षा देती हूं और कुछ नहीं|


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