Essay on Pollution in Hindi | Paryavaran Pradushan | प्रदूषण


Essay on Pollution in Hindi – पर्यावरण प्रदूषण पर निबंध

प्रदूषण (Pollution), वायु, जल एवं स्थल की भौतिक रासायनिक और जैविक विशेषताओं में होने वाला वह अवांछनीय परिवर्तन है, जो मनुष्य और  दूसरे जंतुओं,  पौधों, उद्योगिक संस्थानों तथा दूसरे कच्चे माल इत्यादि को किसी भी रुप में हानि पहुंचाता है| प्रत्येक जीवधारी अपने विकास और व्यवस्थित जीवन कर्म के लिए एक संतुलित वातावरण पर निर्भर रहता है| हमने इस लेख में पर्यावरण प्रदूषण (Paryavaran Pradushan) के बारे में विस्तार से समझाने का प्रयास किया है तो आइए पढ़ते हैं पर्यावरण में मौजूद विभिन्न प्रकार के प्रदूषणों के बारे में एक अच्छा निबंध (Essay on Pollution in Hindi).

Essay on Pollution in Hindi

Essay on Pollution in Hindi

प्रदूषण का अर्थ (Pollution Meaning):-

संतुलित वातावरण में प्रत्येक घटक एक निश्चित मात्रा में उपस्थित रहते हैं कभी-कभी वातावरण अनेक घटकों की मात्रा कम या अधिक हो जाती है या वातावरण में कुछ हानिकारक तत्वों का प्रवेश हो जाता है जिसके परिणाम स्वरुप वातावरण प्रदूषित हो जाता है जो सभी जीव धारियों के लिए किसी न किसी रूप में हानिकारक होता है इसे ही प्रदूषण (Pollution) कहते हैं|

प्रदूषण के प्रकार (Types of pollution in Hindi)

प्रदूषण की समस्या का जन्म जनसंख्या वृद्धि के साथ साथ हुआ है| विकासशील देशों में औद्योगिक तथा रासायनिक कचरे ने जल के साथ-साथ वायु को भी प्रदूषित किया है| भारत जैसे देशों में तो घरेलू कचरे और गंदे जल की निकासी का प्रश्न ही एक बड़ी समस्या बन गया है|

विकसित और विकासशील देशों में विभिन्न प्रकार के प्रदूषण विद्यमान हैं इनमें से कुछ इस प्रकार हैं:-

 

Essay on Pollution in Hindi

1. वायु प्रदूषण (Air pollution in Hindi)

वायुमंडल में विभिन्न प्रकार की गैसें एक विशेष अनुपात में उपस्थित रहती हैं| प्रत्येक जीवधारी अपनी क्रियाओ द्वारा वायुमंडल में ऑक्सीजन (O2) और कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) का संतुलन बनाए रखता है| अपनी श्वसन प्रक्रिया द्वारा हम ऑक्सीजन ग्रहण करते हैं और कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ते हैं|

हरे पौधे, प्रकाश की उपस्थिति में कार्बन डाइऑक्साइड लेकर ऑक्सीजन निष्कासित करते हैं जिससे वातावरण में ऑक्सीजन और कार्बन डाइऑक्साइड का संतुलन बना रहता है| परंतु मनुष्य ने अपनी अज्ञानता और आवश्यकता के नाम पर इस संतुलन को बिगाड़ दिया है| इसे ही वायु प्रदूषण (Air pollution) कहते हैं|

वायु प्रदूषण का मनुष्य के स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है| इससे सांस संबंधी बहुत से रोग हो सकते हैं, जिसमें फेफड़ों का कैंसर, दमा और फेफड़ों से संबंधित अन्य प्रकार के रोग सम्मिलित हैं| वायु में फैले हुए अनेक धातुओं के कण भी बहुत से रोग उत्पन्न करते हैं| शीशे के कण विशेष रूप से नाड़ी मंडल संबंधी रोग उत्पन्न करते हैं

कैडमियम, सांस के माध्यम से एक जहर का कार्य करता है जो रक्तदाब (blood pressure) बढ़ाकर दिल से संबंध में बहुत से रोग उत्पन्न कर देता है|

नाइट्रोजन ऑक्साइड से फेफड़ों, ह्रदय और आंखों के रोग हो जाते हैं| खांसी एवं सीने की दुखन उत्पन्न हो जाती है| इस प्रकार प्रदूषित वायु से चेहरे पर मुंहासे भी उत्पन्न हो जाते हैं|

2. रेडियोधर्मी प्रदूषण (Radioactive pollution in Hindi)

परमाणु शक्ति उत्पादन केंद्रों और परमाणु परीक्षण के फलस्वरुप जल, वायु तथा पृथ्वी का प्रदूषण निरंतर बढ़ता जा रहा है| यह प्रदूषण आज की पीढ़ी के लिए ही नहीं बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी घातक सिद्ध होगा| विस्फोट के समय उत्पन्न रेडियोधर्मी पदार्थ वायुमंडल की परतों में प्रवेश कर जाते हैं जहां पर वह ठंडे होकर संघनित अवस्था में बूंदों का रुप ले लेते हैं और बहुत छोटे-छोटे धूल के कणों के रूप में वायु के झोंके के साथ सारे वायुमंडल में फैल जाते हैं|

द्वितीय विश्वयुद्ध में हिरोशिमा और नागासाकी में हुए परमाणु बम के विस्फोट से बहुत से मनुष्य मारे गए थे| इतना ही नहीं बल्कि इस प्रकार के प्रभावित क्षेत्रों की आने वाली संतान भी अनेक प्रकार के रोगों से ग्रस्त हो गई है|

3. ध्वनि प्रदूषण (Noise pollution in Hindi)

अनेक प्रकार के वाहन जैसे मोटर कार, बस, जेट विमान, ट्रैक्टर, लाउडस्पीकर एवं कारखानों के सायरन तथा विभिन्न प्रकार की मशीनों आदि से ध्वनि प्रदूषण उत्पन्न होता है|

ध्वनि की लहरें जीव धारियों की क्रियाओं को प्रभावित करती हैं| अधिक तेज ध्वनि से मनुष्य के सुनने की शक्ति कम हो जाती है और उसे ठीक प्रकार से नींद भी नहीं आती| यहां तक कि ध्वनि प्रदूषण के प्रभाव स्वरूप स्नायु तंत्र पर कभी-कभी इतना दबाव पड़ जाता है कि पागलपन का रोग भी उत्पन्न हो जाता है|

4. रासायनिक प्रदूषण (Chemical pollution in Hindi):-

ज्यादातर किसान अधिक पैदावार के लिए कीटनाशक और रोग नाशक दवाइयों एवं रसायनों का प्रयोग करते हैं| इनका हमारे स्वास्थ्य पर हानिकारक प्रभाव पड़ता है| आधुनिक पेस्टिसाइड का अंधाधुंध प्रयोग भी लाभ के स्थान पर हानि ही पहुंचा रहा है|

जब यह रसायन वर्षा के जल के साथ बहकर नदियों के माध्यम से सागर में पहुंच जाते हैं तो यह समुद्री जीव जंतुओं तथा वनस्पतियों पर घातक प्रभाव डालते हैं| इतना ही नहीं किसी न किसी रूप में मानव शरीर भी इन से प्रभावित होता है|

प्रदूषण पर नियंत्रण (How to control pollution):-

पर्यावरण में होने वाले प्रदूषण को रोकने तथा उसके समुचित संरक्षण के लिए पिछले कुछ वर्षों से संपूर्ण संसार में एक नई चेतना उत्पन्न हुई है| उद्योगीकरण से पहले यह समस्या इतनी गंभीर कभी नहीं थी और ना ही इस परिस्थिति की और वैज्ञानिकों एवं अन्य लोगों का इतना ध्यान गया था| किंतु औद्योगीकरण और जनसंख्या दोनों की वृद्धि ने संसार के सामने प्रदूषण की गंभीर समस्या उत्पन्न कर दी है|

उद्योगों के कारण उत्पन्न होने वाले प्रदूषण को रोकने के लिए भारत सरकार ने  एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है कि नए उद्योगों को लाइसेंस दिए जाने से पहले उन्हें औद्योगिक कचरे के निस्तारण की समुचित व्यवस्था तथा पर्यावरण विशेषज्ञों से स्वीकृति भी प्राप्त करनी होगी| इसी प्रकार उन्हें धुंए तथा अन्य प्रदूषण के समुचित ढंग से निष्कासन और उसकी व्यवस्था का भी दायित्व लेना होगा|

वनों की अनियंत्रित कटाई को रोकने के लिए कठोर नियम बनाए गए हैं| इस बात के प्रयास किए जा रहे हैं कि नए वन क्षेत्र बनाए जाएं और जन सामान्य को वृक्षारोपण के लिए प्रोत्साहित किया जाए| पर्यावरण के प्रति जागरूकता से ही हम आने वाले समय में और अधिक अच्छा एवं स्वास्थ्यप्रद जीवन व्यतीत कर सकेंगे और आने वाली पीढ़ी को प्रदूषण के अभिशाप से मुक्ति दिला सकेंगे|

Conclusion:-

जैसे-जैसे मनुष्य वैज्ञानिक शक्तियों का विकास कर रहा है, प्रदूषण की समस्या बढ़ती जा रही है| विकसित देशों द्वारा वातावरण का प्रदूषण सबसे अधिक बढ़ रहा है| यह एक ऐसी समस्या है जिसे किसी विशिष्ट क्षेत्र या राष्ट्र की सीमाओं में बांधकर नहीं देखा जा सकता|

यह एक विश्वव्यापी समस्या है इसलिए सभी देशों का संयुक्त प्रयास ही इस समस्या से मुक्ति पाने में सहायक हो सकता है| प्रदूषण की समस्या को रोकने के लिए सरकारी और व्यक्तिगत दोनों ही स्तर पर काम करना होगा तभी यह समस्या खत्म हो सकती है|


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