Essay on Water Pollution in Hindi | जल प्रदूषण

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Essay on Water Pollution in Hindi

जल प्रदूषण पर निबंध

 

Introduction:

चौदहवी शताब्दी में मोहम्मद तुगलक के जीवनकाल में इस्लाम की दुनिया से एक प्रसिद्ध यात्री इब्नबतूता भारत आया था| उसने अपने संस्मरण में उसने गंगाजल की पवित्रता और निर्मलता का उल्लेख करते हुए लिखा है कि मोहम्मद तुगलक ने जब दिल्ली छोड़कर दोलताबाद को अपनी राजधानी बनाया तो उसकी अन्य प्राथमिकताओं में  गंगा के जल का प्रबंध भी सम्मिलित था|

गंगाजल को घोड़े, ऊंट और हाथियों पर लादकर दोलताबाद पहुंचाने में एक से दो महीने लगते थे| कहा जाता है कि गंगाजल (Gangaajal) तब भी साफ और मीठा रहता था| कहने का मतलब यह है कि प्राचीन काल से ही गंगाजल हमारी आस्था और विश्वासों का प्रतीक रहा है, क्योंकि गंगा का जल सभी प्रकार के प्रदूषणों से मुक्त था| किंतु अनियंत्रित औद्योगीकरण, अज्ञानता एवं निजी स्वार्थ के कारण देश की अन्य नदियों के साथ-साथ गंगा को भी दूषित कर दिया गया है|

वैज्ञानिकों का मानना है कि तन मन की सभी बीमारियों को धो डालने की गंगा की औषधीय शक्तियां अब समाप्त होती जा रही है| यदि प्रदूषण इसी गति से बढ़ता रहा तो गंगा के शेष गुण भी शीघ्र ही नष्ट हो जाएंगे और तब ‘गंगा तेरा पानी अमृत’ वाला मुहावरा भी निरर्थक हो जाएगा|

Essay on water pollution in Hindi

 

Essay on water pollution in Hindi [100 words]

 

सभी जीव धारियों के लिए जल बहुत ही महत्वपूर्ण और आवश्यक है पौधे भी अपना भोजन जल के माध्यम से ही प्राप्त करते हैं जल में अनेक प्रकार के खनिज तत्व कार्बनिक एवं अकार्बनिक पदार्थ और कई प्रकार की गैसें घुली रहती है| यदि जल में यह पदार्थ आवश्यकता से अधिक मात्रा में एकत्रित हो जाते हैं तो जल दूषित हो कर हानिकारक हो जाता है|

केंद्रीय जल स्वास्थ्य इंजीनियरिंग अनुसंधान संस्थान के अनुसार भारत में प्रति एक लाख व्यक्तियों में से 360 व्यक्तियों की मृत्यु टाइफाइड और पेचिश  के कारण होती है, जिसका कारण अशुद्ध जल है| जो लोग शहरों में निवास करते हैं उनके लिए भी 100% शुद्ध जल उपलब्ध नहीं होता है|

देश के अनेक शहरों में पेयजल किसी निकटवर्ती नदी से लिया जाता है| इन नदियों में हमेशा शहर के मल मूत्र, कचरा तथा कारखानों से निकलने वाला दूषित पदार्थ भी जमा होता रहता है, जिसके फलस्वरुप हमारे देश की अधिकांश नदियों का जल प्रदूषित होता जा रहा है|

प्रदूषण (Pollution) को रोकने के लिए व्यक्तिगत और सरकारी दोनों ही स्तरों पर प्रयास आवश्यक है| जल प्रदूषण (water pollution) के निवारण एवं नियंत्रण के लिए भारत सरकार ने सन 1974 में जल प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण अधिनियम लागू किया है| इसके अंतर्गत एक केंद्रीय बोर्ड एवं सभी प्रदेशों में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड गठित किए गए हैं| इन बोर्डो ने प्रदूषण फोन नियंत्रित करने की कई योजनाएं तैयार की है तथा औद्योगिक क्षेत्रों से निकलने वाले कचरे के लिए भी मानक (standard) निर्धारित किए हैं|


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