Bhagwan Ram story in Hindi | हिंसा की सजा


Bhagwan Ram story – हिंसा की सजा

राम (Bhagwan Ram) बहुत ही न्याय प्रिय राजा थे| वह प्रतिदिन लोगों की मुश्किलें हल करने की कोशिश करते थे| एक दिन शाम को उन्होंने लक्ष्मण को बाहर जाकर देखने को कहा कि कोई और व्यक्ति तो इंतजार नहीं कर रहा है|

Bhagwan Ram

 

Bhagwan Ram

बाहर जाकर लक्ष्मण की नजर एक कुत्ते पर पड़ी जो बहुत उदास बैठा था| लक्ष्मण ने उससे पूछा कि तुम उदास क्यों हो?

कुत्ता बोला:- मैं राम से न्याय चाहता हूं| लक्ष्मण उसे अंदर ले गए| कुत्ते ने राजा रामचंद्र (Bhagwan Ram) को प्रणाम किया और कहा,

हे राम, मैं न्याय चाहता हूं|मेरी साथ बेवजह हिंसा की गई है| स्वार्थ सिद्ध नाम के व्यक्ति ने बिना किसी वजह मेरे सिर पर डंडे से वार किया |

 

 

राम (Bhagwan Ram) ने तत्काल स्वार्थ सिद्ध को बुलाया| उसने स्वीकार किया कि मैं इस कुत्ते का अपराधी हूं| मैं भूख से परेशान और

निराश था| यह कुत्ता रास्ते में बैठा हुआ था इसलिए गुस्से में मैंने इसके सिर पर मार दिया| आप मुझे जो सजा देना चाहें मुझे स्वीकार है|

 

राम ने इस बारे में मंत्रियों और दरबारियों की सलाह ली परंतु कोई कुछ ना कह सका|

राम ने कुत्ते से ही पूछा, तुम ही बताओ| कुत्ते ने कहा, इसे कालिंजर मठ का महंत बना दीजिए| राम (Bhagwan Ram) ने कहा, तथास्तु|

यह सुनकर दरबारियों को हैरानी हुई और सोचने लगे कि यह दंड है या पुरस्कार?

कुत्ते ने कहा, पिछले जन्म में मैं इसी मठ का महंत था| अपनी प्रसिद्धि को देखकर मैं अपना कर्तव्य भूल बैठा था और अहंकारी हो गया था,

जिसके परिणाम स्वरुप मुझे कुत्ते की योनि में जन्म मिला है| स्वार्थ सिद्ध में गुस्सा है, अहंकार है| इसलिए उसकी भी वही गति होगी जो मेरी

हुई है|

अहंकार मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु है|

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