Chanakya Niti in Hindi | संपूर्ण चाणक्य नीति हिंदी में

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चाणक्य नीति

Chanakya Niti in Hindi

जब कहीं भी इतिहास में चंद्रगुप्त मौर्य का नाम आता है तो हमेशा दिमाग में एक चीज और आती है और वह है चाणक्य नीति (Chanakya Niti)| चाणक्य नीति (Chanakya Niti) विश्व की सबसे बड़ी राजनीतिक कला है| आचार्य चाणक्य (Chanakya) ने जब मानव जाति के धर्म को बंधनों में जकड़े देखा तो उन्होंने सोचा कि आज मानवता को धर्म के बारे में पूरा ज्ञान देना आवश्यक है, इस तरह जन्म होता है चाणक्य नीति (Chanakya Niti) का|

Chanakya Niti

Chanakya Niti

 एक साधारण युवक चंद्रगुप्त मौर्य को राजा बना देने वाले महान राजनीतिज्ञ व अर्थशास्त्री आचार्य चाणक्य (Chanakya) के द्वारा बताई गई जीवन के प्रति महत्वपूर्ण बातें (चाणक्य नीति) कुछ इस प्रकार हैं:-

Complete Chanakya Niti

 

मनुष्य की चार चीजों की भूख कभी नहीं मिटती:- धन, जीवन, वासना और भोजन

इन सबके लिए मनुष्य हमेशा भूखा रहता है, भले ही उसे यह चीजें कितनी भी

मिल जाएं लेकिन उसकी लालसा समाप्त नहीं होती|

 

 

जीवन के इस लंबे सफर में यह सोच कर चलें कि कभी भी आप पर बुरा

समय आ सकता है,इसलिए ऐसे समय के लिए थोड़ा बहुत धन अवश्य

बचा कर रखना चाहिए| जब भी कभी इंसान पर बुरा समय आता है तो उसके

अपने भी पराए हो जाते हैं, यदि धन उसके पास हो तो वह इस समय का

मुकाबला कर सकता है|

 

 

बहुत भले बनकर जीवन नहीं व्यतीत किया जा सकता| भले और सीधे आदमी

को हर कोई दबा लेता है, उसकी शराफत और ईमानदारी को लोग पागलपन

समझते हैं, जैसे जंगल में सीधे पेड़ों को पहले काटा जाता है तथा टेढ़े-मेढ़े पेड़ों छेड़ते हैं|

इसलिए आप इतने सीधे मत बनिए कि लोग लूटकर ही खा जाएं|

 

 

उल्लू दिन में नहीं देख सकता, इसमें भला सूर्य का क्या दोष है| कदीन के पेड़ पर पत्ते

नहीं आते हैं और न हीं फूल खिलते ,हैं इसमें बसंत ऋतु का क्या दोष है|चातक के

मुंह में वर्षा की एक बूंद नहीं गिरती, इसमें भला बादल का क्या दोष है| यूं समझ लो

कि यह सब कुछ विधाता की ही देन है|

chanakya niti

Chanakya Niti

ईश्वर महान है, सर्वशक्तिमान है |

इस संसार की सारी बागडोर ईश्वर के हाथ में है|

ईश्वर ही राजा को दास और दास को राजा बना देता है,

ईश्वर ही गरीब को अमीर और अमीर को गरीब बना देता है,

ईश्वर पर भरोसा रखो वही सबका ख्याल रखता है|

 

Top 75 Chanakya Quotes About Life | चाणक्य के 75 अनमोल वचन

 

हर पहाड़ के अंदर हीरे नहीं होते,

हर हाथी के मस्तक पर मुक्ता नहीं होती,

सब स्थानों पर अच्छे आदमी नहीं मिलते,

हर स्थान पर चंदन नहीं होता,

हर चमकने वाली चीज सोना नहीं होती,

यह सारी दुनिया विवादों से घिरी हुई है,

इसलिए जीवन में कोई भी निर्णय लेने से पहले अवश्य सोचना चाहिए|

 

जैसे हाथी बूढ़ा होने पर भी चंचल रहता है,

गन्ना कोल्हू में पीडे जाने पर भी अपनी मिठास नहीं छोड़ता और

सोना आग में तपने के बाद भी अपनी चमक नहीं खोता,

इसी प्रकार से अच्छे चरित्र वाले लोग कहीं भी चले जाएं वह अपने गुणों को नहीं छोड़ते|

 

कुछ पागल आदमियों ने पत्थर के टुकड़ों को ही रत्न मान लिया है,

असली रत्न तो केवल अनाज पानी और ज्ञान ही होते हैं|

इन तीनों रत्नों से बड़ा रत्न और कोई नहीं हो सकता|

 

पाप और पुण्य में क्या अंतर होते हैं?

मेरे शत्रु कौन है और मित्र कौन हैं?

मुझे किस कार्य में लाभ हो सकता है तथा किसमें हानि?

यह सोच कर मनुष्य को जीवन का हर पग उठाना चाहिए|

 

कठिन काम पड़ने पर सेवक की,

संकट के समय भाई-बंधु की,

आपत्ति काल में मित्र की तथा

धन के नाश हो जाने पर स्त्री की परीक्षा होती है|

 

शेर से एक, बुगले से चार, कौए से पांच, कुत्ते से छः और बाघ से 3 गुण सीखने चाहिए:

काम भले ही थोड़ा करो किंतु मन लगाकर करना चाहिए ,

इंसान को यह शेर से सीखना चाहिए|

समय के अनुसार अपनी शक्ति से काम करने का गुण बुगले से सीखना चाहिए|

ठीक समय से जागना, सोना, लड़ना, झपट कर भोजन करना,

यह गुण मुर्गे से सीखने चाहिए|

समय-समय पर संग्रह करना, चौकस रहना, दूसरों पर विश्वास न करना,

यह गुण कौए  से सीखना चाहिए|

बहुत भूख में भी संतुष्ट रहना, गहरी नींद में सोते हुए भी जागे रहना,

मालिक की वफादारी  के  गुण कुत्ते से सीखने चाहिए|

 

यदि धन का नाश हो जाए, मन की शांति भंग हो जाए तो इन सब बातों को बुद्धिमान

लोग दूसरों को नहीं बताते| जो व्यक्ति दूसरों को बताने की भूल करते हैं,

लोग उनका मजाक बनाते हैं|

 

अपने हाथों से किया हुआ काम सबसे श्रेष्ठ होता है, इसलिए मनुष्य को अपना

हर कार्य अपने हाथों से स्वयं करना चाहिए|

 

अंधाधुंध खर्च करने वाला तथा जो अपनी आमदनी से अधिक खर्च करते हैं

और दूसरों से  झगड़ा करते हैं ऐसे लोग कभी सुखी नहीं रह सकते|

 

जैसे धरती खोदने से उसमें से पानी निकलता है, वैसे ही गुरु की सेवा करने से विद्या

प्राप्त होती है, यह बात सदा याद रखें कि गुरु की सेवा के बिना इंसान कभी अच्छी

शिक्षा प्राप्त नहीं कर सकता|

 

कोई भी कार्य आरंभ करने से पहले यह प्रश्न करने चाहिए:-

यह कार्य मैं क्यों कर रहा हूं?

इसका क्या फल मिलेगा?

इन प्रश्नों का उत्तर गंभीरता से अपने मन में ढूंढने का प्रयत्न करें

इसके पश्चात ही काम आरंभ करें|

 

जो नारी अपने पति का कहना नहीं मानती और व्रत रखती है,

ऐसी नारियां अपने पति की आयु कम करती है|

ऐसी नारियों को यह सोचना चाहिए कि पति की आज्ञा के बिना चलना

उनके लिए कभी भी लाभदायक नहीं हो सकता|

उनके लिए स्वर्ग की प्राप्ति केवल पति की सेवा से ही संभव है|

 

जीवन का अर्थ यही है कि इसे सदा अच्छे काम में लगाए रखें,

अच्छे भले ज्ञान के कामों से ही पुरुष महान बनता है|

यह मत भूलो कि यह जीवन अस्थाई है|

इसलिए इस जीवन के हर पल का उपयोग किसी अच्छे कार्य के लिए किया जाना चाहिए|

जब तक जीवन है तब तक हर चीज में आनंद है

किंतु जैसे ही मृत्यु आकर जीवन का अंत कर देती है,

इसके साथ ही हर चीज का अंत हो जाता है|

 

पुरुष आदि काल से ही चंचल है|

इस संसार में भगवान को छोड़कर हर चीज़ अस्थाई है|

लक्ष्मी तो रमणी है सदा न्रत्य करती है |

यह धन रिश्ते-नाते घर द्वार सब अस्थाई हैं| इ

नमें से कोई किसी का साथ नहीं देता, केवल धर्म ही है जो अटल सत्य है|

यह ज्ञान का भंडार है|

 

दूसरों का भला चाहने वाले ही तो आत्मिक शांति प्राप्त कर सकते हैं|

इंद्रियों पर संयम और जीवो पर दया करने से ही मुक्ति मिलती है|

 

कर्म से ही इंसान छोटा बड़ा बनता है,

इसलिए सदा अच्छे कर्म करो और बुराई से दूर रहो|

अच्छे कर्म करने से ही जीवन में शांति और सुख की प्राप्ति होती है|

 

जिस तरह से फूलों में खुशबू, तिलो में तेल, लकड़ी में आग, दूध में घी,

इन सब चीजों को बाहर से देख कर आप इन के गुणों का अंदाजा नहीं लगा सकते

क्योंकि यह गुण बाहर से दिखाई नहीं देते| इन दोनों को पहचानने के लिए बुद्धि की

आवश्यकता होती है, ठीक उसी प्रकार मानव शरीर में आत्मा का निवास होता है|

किसी आत्मा को हम शरीर से अलग करके नहीं पहचान सकते,

केवल अपने विचारों से ही इसकी परख कर सकते हैं|

 

देवता मिट्टी की मूर्तियों अथवा ऊंचे मंदिरों में विद्यमान नहीं है,

देवता तो केवल हमारी आत्मा और हमारी भावनाओं में बसे हुए हैं|

जैसी आपकी भावनाएं होगी वैसा ही देवता का रूप होगा|

भावनाओं का ही प्रभाव जीवन के हर पहलू पर पड़ता है,

जैसी किसी की भावना होगी वैसा ही फल मिलेगा |

इसलिए अच्छा फल पाने के लिए अपनी भावनाओं को शुद्ध रखिए|

 

जो ब्राह्मण प्राकृतिक रूप से पैदा हुए फल और अन्य पदार्थों को खा पीकर

इस संसार से दूर जंगल में रहते हुए भगवान की पूजा करता है,

वही सच्चा भक्त महापुरुष एवं सच्चा ब्राह्मण माना जाता है|

 

बुरे इंसान और सांप में कौन अच्छा है? इस प्रश्न का उत्तर यही है कि

सांप तो केवल समय आने पर ही काटता है

किंतु बुरे लोग हर पल बुराई करते रहते हैं,

इसलिए बुरा इंसान तो हर समय बुराई करके सांप से भी भयंकर हो सकता है|

 

सागर सबसे महान है किंतु इसमें भी तूफान आते हैं

अपनी सारी सीमाएं तोड़ कर विनाश कर देता है,

परंतु सच्चे साधु और ज्ञानी लोग कभी भी अपनी सीमाएं नहीं तोड़ते|

 

कोई मनुष्य भले ही कितना भी सुंदर हो तथा उसका जन्म

भले ही कितने बड़े घराने में हुआ हो ,परंतु यदि वह पढ़ा-लिखा नहीं है

तो उसकी हालत उस फूल के जैसी होती है

जो देखने में तो सुंदर है परंतु सुगंध से वंचित है|

 

शस्त्रधारी कभी भी हमला कर सकता है,

सींग वाले पशु कभी भी सींग मारकर जख्मी कर सकते हैं,

स्त्रियां कभी भी झूठा लांछन लगा सकती है और

राजघराने के लोग जरा जरा सी बात पर बिगड़ जाते हैं,

इसलिए उनसे कभी भी खतरा पैदा हो सकता है|

इन लोगों की दोस्ती और दुश्मनी दोनों ही बुरी हैं|

 

दक्षिणा लेने के बाद ब्राह्मण, यजमान को, विद्या प्राप्त करने के बाद

शिष्य गुरु को छोड़ कर चले जाते हैं,

यही संसार का नियम है कि हर जीव जंतु और मनुष्य

अपना काम होने पर छोड़ देते हैं|

 

पूजा-पाठ केवल एकांत में करनी चाहिए,

विद्यार्थियों को इकट्ठा बैठकर पढ़ना चाहिए,

मिलकर खेती करने से फसल अच्छी होती है,

इसी तरह यदि बहुत सारे लोग मिलकर सब शत्रु से युद्ध करें तो उन्हें विजय प्राप्त होती है|

 

सूर्य के प्रकाश के सामने दीपक का कोई मोल नहीं है,

इसी तरह अमीर आदमी को दान देने से कोई लाभ नहीं है|

दान हमेशा उसे ही दो जो गरीब हो|

 

अपने भाइयों सगे-संबंधियों के बीच छोटा बनकर रहने से कहीं अच्छा है कि आदमी

जंगल में जाकर रहने लगे, जहां पर बड़े-बड़े हाथी एवं बाघ रहते हैं|

खाने के लिए पत्ते और पीने के लिए तालाब को गंदा पानी मिले|

ऐसे वातावरण में भी तुम्हें आत्मिक शांति मिलेगी

क्योंकि वहां आप अपने आप को छोटा नहीं समझेंगे|

 

अमृत से सबको जीवन मिलता है

परंतु शिव भगवान विष पीकर और भी पूजनीय होते हैं,

इसलिए हर काम केवल पात्र पर निर्भर होता है|

 

महा पापी कौन है?

जो दूर से आए हुए सीधे-साधे और भले प्राणी को विश्राम की जगह ना दे,

जो घर आए मेहमान को खाना ना खिलाए,

जो दूसरों का माल हजम कर जाए, ऐसे लोग महा पापी होते हैं|

 

आग, पानी, सांप और राजा इन सब से मित्रता करने से घाटा ही घाटा है

क्योंकि यह क्रोध में आकर प्राणी की जान भी ले सकते हैं|

 

धरती पर कौन ऐसा है जिसे धन पाकर गर्व न हुआ हो,

ऐसा कौन प्राणी है जिसे नारी ने व्याकुल ना किया हो,

कौन मौत के पंजे से बच पाया है,

कौन ऐसा है जो बुराई के जाल में नहीं फसा हो,

कौन ऐसा है जो स्वादिष्ट खाने को देख कर मुंह में पानी न भर लाया हो,

सच तो यह है कि हम सब हमाम में नंगे हैं|

 

ताकतवर आदमी कभी साधु नहीं बनता,

धनवान व्यक्ति कभी ब्रह्मचारी नहीं बनता,

सेहतमंद आदमी भक्ति नहीं करता और

सुंदर नारी पतिव्रता धर्म के गुण कम ही गाती है|

 

गाय कुछ भी खा ले परंतु दूध ही देती है, इसी दूध से बढ़िया से बढ़िया पदार्थ बनते हैं,

इसी तरह से बुद्धिमान प्राणी कुछ भी करें, उनका ज्ञान कभी कम नहीं होता |

 

तेल में पानी नहीं मिलता,

घी में से जल नहीं निकलता,

पारा किसी से नहीं मिल सकता|

इसी प्रकार विपरीत स्वभाव वाले व्यक्ति एक दूसरे से कभी नहीं मिल सकते|


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One Thought to “Chanakya Niti in Hindi | संपूर्ण चाणक्य नीति हिंदी में”

  1. जैसा आपकी वेबसाइट का नाम है आप बिलकुल उसी तरह की जानकारी देते हैं

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