Tenali Raman Stories in Hindi | तेनालीराम के कारनामे

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तेनालीराम के कारनामे

Tenali Raman Stories in Hindi

तेनालीराम के बारे में:- [About Tenali Raman]

 

 

विजयनगर राज्य के महाराजा कृष्णदेव राय के दरबार में तेनालीराम का प्रथम स्थान था उनकी गणना महाराज के नवरत्नों में की जाती थी| तेनालीराम बुद्धिमान, राजनीतिज्ञ व चतुर व्यक्ति थे|

तेनालीराम बहुत से कठिन प्रश्नों को अपनी बुद्धि के बल पर आसान बना दिया करते थे| वह समय समय पर शासन को उत्तम ढंग से चलाने के लिए राजा कृष्णदेव राय को सलाह भी दिया करते थे|

तेनालीराम की शिक्षाप्रद बातें हमें जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा प्रदान करती हैं| उन्हीं में से कुछ कहानियां नीचे दी गई है:-

 

Tenali Raman Stories in Hindi #1- मूर्खों की लिस्ट

 

एक बार की बात है कि घोड़ों का एक व्यापारी महाराज कृष्णदेव राय के दरबार में आकर महाराज से कहने लगा कि मैं घोड़ों का व्यापारी हूं| मेरे पास उत्तम किस्म के घोड़े हैं| मैं उन्हें आप को बेचना चाहता हूं| यदि आप उन्हें खरीदना चाहे तो आप मुझे 5000 सोने के सिक्के पेशगी के रूप में दे देंगे, तो मैं आपको 2 दिन बाद घोड़े लाकर दूंगा|

महाराज ने उसकी बातों पर विश्वास करके उसे 5000 सोने के सिक्के दे दिए| व्यापारी 2 दिन बाद आने का वायदा करके चला गया| व्यापारी के जाने के बाद महाराज ने देखा कि तेनालीराम कागज पर कुछ लिख रहा है|

महाराज ने तेनालीराम से पूछा:- ‘तुम क्या लिख रहे हो’? तेनालीराम बोला:- ‘महाराज, में मूर्खों की लिस्ट बना रहा हूं| महाराज ने लिस्ट को देखा तो सबसे ऊपर महाराज का ही नाम लिखा था|

महाराज क्रोध से बोले- ‘यह क्या है’? क्या तुम मुझे मुर्ख समझते हो| इस पर तेनालीराम बोला:- ‘महाराज, जब आप उस व्यापारी को जानते ही नहीं, तो आपने उसकी बात पर विश्वास करके उसे 5000 सोने के सिक्के कैसे दे दिए|

यह सुनकर कृष्णदेव राय मुस्कुराए और बोले:- तुम्हें व्यापारी पर शक है कि वह वापस नहीं आएगा| परंतु हमें पूरा विश्वास है कि वह अवश्य वापस आएगा| उन्होंने तेनालीराम से पूछा कि यदि वह वापस आया तो तुम इस लिस्ट का क्या करोगे|

इस पर तेनालीराम हंसकर बोला:- ‘महाराज, यदि व्यापारी वापस आया तो मैं आपका नाम हटाकर सबसे ऊपर उसका नाम लिख दूंगा जो आपसे 5000 सोने के सिक्के लेकर भी वापस आएगा| तेनालीराम की इस बात को सुनकर कृष्णदेव राय जोर-जोर से हंसने लगे|

पढ़िए और भी प्रेरणादायक कहानियां :-

Tenali Raman Stories in Hindi #2 – कुएं की शादी

 

एक बार की बात है कि महाराज कृष्णदेव राय और तेनालीराम में किसी बात पर नोकझोंक हो गई| तेनालीराम नाराज होकर दरबार छोड़कर कहीं दूर चले गए|

महाराज ने अपने सेवकों से तेनालीराम को ढूंढने की बहुत कोशिश की परंतु तेलानीराम का कोई सुराग नहीं मिला| इसके बाद राजा को तेनालीराम को ढूंढने का एक उपाय सूझा| उन्होंने प्रत्येक राज्य के प्रत्येक गांव-कस्बों में मुनादी करवा दी कि महाराज अपने राजकीय कुएं का विवाह कर रहे |हैं इसलिए प्रत्येक गांव व कस्बों के मुखिया अपने-अपने कुंओ के साथ विवाह में शामिल हो|

जो मुखिया विवाह में शामिल नहीं होगा उसे 20000 स्वर्ण मुद्राएं जुर्माने के रुप में देनी होगी| इस घोषणा से सभी मुखिया परेशान हो गए और सोचने लगे, भला कुआं भी कहीं ले जाया जा सकता है| अवश्य ही महाराज का दिमाग फिर गया है|

जिस गांव में तेलानीराम रुका हुआ था वहां का मुखिया भी इस घोषणा को सुनकर परेशान हो गया| तेनालीराम समझ गया कि यह घोषणा राजा ने उसे ढूंढने के लिए कराई है| इसलिए तेलानीराम मुखिया के पास जाकर बोला कि आप इस घोषणा से चिंतित ना हो| आपने मुझे इस गांव में आश्रय दिया है इसलिए मेरा भी कर्तव्य है कि मैं आपको इस मुसीबत से छुटकारा दिलाऊं|

आप मेरे साथ चलने की तैयारी शुरू करें| तेनालीराम, मुखिया और गांव के चार व्यक्ति विजय नगर की ओर चल दिए| विजयनगर के पास पहुंचकर वे लोग एक स्थान पर ठहर गए| तेनालीराम के बताए हुए उपाय के अनुसार मुखिया, महाराज के पास जाकर बोला:-” महाराज, हमारे गांव के कुछ लोग आपके कुएं के विवाह में शामिल होने के लिए आए हैं| यदि नगर के सारे कुएं उनके स्वागत के लिए चलेंगे तो अच्छा होगा”|

यह सुनकर महाराज कृष्णदेव राय समझ गए कि यह तेनालीराम की सूझबूझ हो सकती है महाराज ने मुखिया से कहा:- “सच सच बताओ, तुम्हें यह उपाय किसने बताया है”|

मुखिया बोला:- “महाराज, हमारे गांव में एक परदेसी आकर ठहरा है, उसी ने हमें यह बात बताई है| वह व्यक्ति भी नगर के बाहर हमारे आदमियों के साथ ठहरा है”|

महाराज यह सुनकर बहुत प्रसन्न हुए वह स्वयं नगर के बाहर गए और बड़ी धूमधाम के साथ तेनालीराम को अपने साथ ले आए तथा गांव वालों को पुरस्कार देकर विदा किया|

 

Tenali Raman Stories in Hindi #3 – बंद दरवाजे

 

एक बार की बात है कि राजा कृष्णदेव राय ने दरबार में जादू का खेल देखने की इच्छा प्रकट की| एक मशहूर जादूगर को बुलाया गया, जिस का खेल देखकर दरबारियों ने जादूगर की बड़ी प्रशंसा की|

महाराज कृष्णदेव राय जादूगर से बोले:- “कोई ऐसा करतब दिखाओ कि जो अब तक किसी ने ना दिखाया हो और ना आज तक ऐसा करतब किसी ने देखा हो”|

महाराज की बात सुनकर जादूगर बोला:- “मैं जादू का एक ऐसा खेल दिखा सकता हूं कि जिसे आज तक किसी ने भी नहीं देखा होगा”| इसके लिए आपको पूर्णमासी की रात्रि तक प्रतीक्षा करनी होगी| पूर्णमासी की रात्रि को आप और सभी दरबारियों तथा नगर वासियों को लेकर जंगल में तालाब के किनारे आ जाएं| वहां मैं आप को साक्षात परियों से मिलवा दूंगा|

यह सुनकर राजा बहुत प्रसन्न हुए| पूर्णमासी आने पर रात को महाराज, सभी दरबारी और नगरवासी को लेकर, जंगल के तालाब पर जाने के लिए नगर के द्वार पर पहुंचे, तो क्या देखते हैं कि नगर के फाटकों पर ताला लगा हुआ है| राजा ने पता करवाया कि किसने फाटक पर ताला लगाया है| तो मालूम हुआ कि तेनालीराम के आदेश पर सब फाटकों पर ताला लगाया गया है|

महाराज कृष्णदेव राय ने तेनालीराम को बुलवाया और क्रोध में आकर बोले:- “तेनालीराम, क्या तुम्हें पता नहीं है कि आज हम सब लोग जंगल में तालाब के पास परियों से मिलने वाले हैं| तुमने यह आपराधिक कदम क्यों उठाया है”|

तेनालीराम बोला:-” महाराज, आप जिन परियों को देखने के लिए तालाब पर जा रहे हैं,वे सब यहीं पर मौजूद है | यहां से वे परियां भाग न जाएं इसलिए तो फाटकों पर ताले डाले गए हैं| इसके बाद तेलानी राम ने सैनिकों को सब परियों को लाने का आदेश दिया| सैनिकों को आज्ञा मिलने पर वे उन आदमियों को पकड़कर ले आए जिन्होंने परियों का वेष धारण कर रखा था| महाराज बोले:- “यह क्या मजाक है, क्या मामला है?”

तेनालीराम ने बताया कि- महाराज, जब जादूगर ने साक्षात परियों से मिलवाने की घोषणा की तो मुझे कुछ दाल में काला नजर आया और मैंने अपने गुप्तचर इस जादूगर के पीछे लगा दिए| मुझे पता चला कि यह जादूगर एक लुटेरा है|

यह आपको तथा सब दरबारियों व नगर वासियों को रात्रि में तालाब के किनारे एकत्र करके पीछे से सारा खजाना लेकर भागने वाला था| क्योंकि उस समय इसका विरोध करने वाला पूरे नगर में कोई भी नहीं होता| यह सुनकर महाराज ने सैनिकों को आदेश दिया कि ‘जादूगर को पकड़कर कैदखाने में डाल दिया जाए’| तेनालीराम की इस चतुराई के कारण राज्य का धन लुटने से बच गया|

Tenali Raman Stories in Hindi #4 – नदी का पुल

 

महाराज कृष्णदेव राय का दरबार लगा हुआ था| द्वारपाल ने महाराज को सूचना दी कि एक गांव के कुछ व्यक्ति आपसे मिलना चाहते हैं| महाराज ने उन्हें अंदर आने की आज्ञा प्रदान की|

गांव के लोगों ने कहा:- “महाराज हमारे गांव के पास से होकर एक नदी बहती है और वर्षा ऋतु में उस नदी में उफान आ जाता है| नदी पर कोई पुल नहीं होने के कारण गांव में आने जाने के लिए नाव का सहारा लेना पड़ता है| वर्षा ऋतु में बाढ़ आ जाने के कारण नाव का सहारा भी खत्म हो गया है| इसलिए हम आपसे प्रार्थना करते हैं कि यदि आप नदी पर पक्का पुल बनवा दे तो गांव वालों पर आपकी अति कृपा होगी”|

कृष्णदेव राय को गांव वालों की बात उचित लगी और उन्होंने दरबारियों से सलाह करके नदी पर पुल बनवाने की स्वीकृति प्रदान कर दी| गांव वाले खुशी-खुशी अपने घर लौट गए|

उधर जब लोगों को पता चला कि महाराज ने नदी पर पुल बनवाने की स्वीकृति प्रदान कर दी है, तो बहुत से लोग पुल बनवाने का ठेका पाने की जुगत में लग गए|

परंतु महाराज के एक मंत्री व राजपुरोहित हर किसी के काम में कमी निकाल कर उन्हें वापस भेज देते थे| अंत में मंत्री महोदय ने यह ठेका अपने भतीजे को दिलवा दिया और पुल बनाने का काम शुरु हो गया|

राजा कृष्णदेव राय अपने मंत्री से पुल बनने के कार्य के बारे में पूछते रहते थे| अंत में एक दिन मंत्री के भतीजे ने राजा को दरबार में आकर सूचना दी कि महाराज! पुल बनकर तैयार हो गया है| राजा बहुत प्रसन्न हुए और ठेकेदार को काफी इनाम भी दिया|

उधर तेनालीराम भी अपने तरीके से पुल बनाने के बारे में सूचना एकत्र कर रहा था| अंत में जब महाराज खुश होकर इनाम के अतिरिक्त मंत्री के भतीजे को अपने गले का हार उतार कर देना चाह रहे थे, तो उनकी दृष्टि तेनालीराम पर पड़ी जो अपने कुर्ते की जेब से कोई चीज बाहर निकालता तो कभी अंदर रख लेता|

यह देखकर राजा ने तेनालीराम से पूछा:- “तुम बार-बार अपनी जेब से क्या निकाल रहे हो? जरा हम भी तो देखें कि वह क्या वस्तु है”?

राजा की यह बात सुनकर तेनालीराम ने वह वस्तु अपनी जेब से निकालकर राजा को दिखाई और बोला:- “महाराज नदी पर बना पुल इस लकड़ी के खिलौने के जैसा ही है जो दो-चार दिन में टूट कर गिर जाएगा”|

राजा कृष्णदेव राय यह सुनकर क्रोधित हो गए तथा मंत्री के भतीजे को कारागार में डाल दिया और नदी पर पुल बनवाने की जिम्मेदारी अब तेलानीराम को सौंप दी गई|

Tenali Raman Stories in Hindi #5 – कुबड़ा धोबी

 

 

एक समय की बात है कि तेनालीराम को पता चला कि विजयनगर राज्य में एक आदमी साधु का वेश धारण करके सीधे-साधे आदमी को अपने जाल में फंसा कर उन्हें प्रसाद में धतूरा खिलाकर उनके पैसे लूट लेता है|

साधु के खिलाफ कोई सबूत ना होने के कारण वह स्वतंत्र रूप से नगर में घूमता फिरता था| तेनालीराम ने सोचा कि इस साधु रूपी दुष्ट आदमी को अवश्य ही सजा मिलनी चाहिए|

एक दिन उस साधु की मुलाकात तेनालीराम से हो गई| तेनालीराम इस साधु को उस पागल आदमी के पास ले गया जिसे इसने प्रसाद में धतूरा खिलाया था| तेनालीराम ने साधु का हाथ पकड़कर पागल आदमी के सिर पर दे मारा| उस पागल आदमी ने साधु को पहचान लिया उसने साधु के बाल पकड़कर उसका सिर जमीन पर पटकना शुरू कर दिया| उसने साधु को इतना मारा कि साधु के प्राण पखेरु उड़ गए|

मामला राजा के दरबार में पहुंचा| राजा ने पागल आदमी को तो छोड़ दिया परंतु तेनालीराम को साधु की मौत का जिम्मेदार ठहरा कर उसके लिए सजा का ऐलान कर दिया| राजा ने आज्ञा दी कि तेनालीराम को हाथी के पांव से कुचलवाया जाए|

राजा के दो सिपाही तेनालीराम को पकड़कर सुनसान जगह पर ले गए| उन्होंने एक बड़ा सा गड्ढा खोदकर तेलानी राम को गर्दन तक दबाकर खड़ा कर दिया| इसके बाद दोनों सिपाही हाथी लेने के लिए चले गए|

थोड़ी देर बाद एक कुबड़ा धोबी उधर से गुजरा| तेनालीराम को देखकर वह कुबड़ा बोला:- ” तुम जमीन में गर्दन तक फंसे हुए क्यों खड़े हो”? क्या मैं तुम्हारी कुछ सहायता कर सकता हूं|

तेनालीराम बोला:- “कभी मैं भी तुम्हारी तरह कुबड़ा था| पूरे 10 साल से मैं इस कुबड़ेपन को झेल रहा था| मुझे कल एक साधु ने बताया कि यदि तुम किसी पवित्र स्थान में 24 घंटे बिना किसी से बात किए गर्दन तक अपने शरीर को गड्ढे में दबा कर खड़े रहोगे, तो तुम ठीक हो जाओगे”|

जरा मुझे बाहर निकाल कर देखो कि मेरा कुंवर ठीक हो गया है या नहीं|

धोबी ने मिट्टी हटाकर तेनालीराम को गड्ढे से बाहर निकाला तो क्या देखता है कि तेनालीराम बिल्कुल ठीक हो गया है| धोबी, तेनालीराम से बोला:- “मुझे पता नहीं था कि इसका इतना आसान इलाज है| तुम मुझे भी इस गड्ढे में गाड़ दो और मेरे कपड़े मेरी पत्नी को दे देना”|

धोबी ने तेनालीराम को अपने घर का पता बता दिया| धोबी ने कहा:- “मेरी पत्नी से कहना कि सवेरा होने पर मेरे लिए नाश्ता बना कर ले आए”| मैं आपका एहसान कभी नहीं भूलूंगा| तेनालीराम को ऐसे ही मूर्ख आदमी की जरूरत थी जो उसकी जगह गड्ढे में खड़ा हो जाए|

तेनालीराम उसके कपड़े उठाकर बोला:- “अच्छा मैं चलता हूं”| अपनी आंखे और मुंह को बंद रखना, चाहे कुछ भी हो जाए| नहीं तो यह दोगुना बड़ा हो जाएगा और तुम्हारी मेहनत बेकार हो जाएगी|

धोबी बोला:- “चिंता ना करो, यह मुझे बहुत परेशान कर रहा था”| कुछ देर बाद राजा के सिपाही एक हाथी लेकर पहुंच गए| तेनालीराम की जगह खड़े धोबी के सिर को हाथी के पैरों से कुचल दिया गया| सिपाही को पता ही नहीं चला कि यह कोई और व्यक्ति है|

सिपाहियों ने राजा को तेलानीराम की मृत्यु का समाचार सुना दिया| इस वक्त राजा का क्रोध भी शांत हो चुका था| वह बहुत दुखी हुए और अब राजा को साधु के कारनामों का भी पता चल चुका था| राजा सोच रहे थे कि एक दुष्ट और चालाक साधु के कारण तेनालीराम को मृत्यु का सामना करना पड़ा| उन्हें बहुत अफसोस हो रहा था|

राजा इन बातों पर विचार कर ही रहे थे कि तेनालीराम ने दरबार में आकर राजा के पैर पकड़ लिए एवं उनकी जय जयकार करने लगा| राजा कृष्णदेव राय, तेनालीराम को आश्चर्य से देखते रहे| तेलानी राम ने कृष्णदेव राय को सारी कहानी सुनाई| राजा ने तेनालीराम को तो क्षमा कर दिया किंतु बेचारा कुबड़ा धोबी बेमौत मारा गया|

Tenali Raman Stories in Hindi #6 – कड़वा नीम

 

एक बार विजयनगर के पड़ोसी राज्य ने विजयनगर पर आक्रमण कर दिया| इस युद्ध में विजय नगर के महाराज कृष्णदेव राय की विजय हुई| कृष्णदेव राय जब अपनी राजधानी पहुंचे तो तेलानीराम (Tenali Raman)रास्ते में ही पीछे रह गए|

अगले दिन प्रत्येक दरबारी इस युद्ध को जीतने की खुशी में महाराज कृष्णदेव राय को अपनी तरफ से कुछ न कुछ उपहार दे रहे थे| इतने में तेनालीराम द्वारा भेजे गए एक आदमी ने राजा को नीम का पौधा भेंट किया तथा बताया कि यह उपहार आपके लिए तेनालीराम ने भेजा है|

यह सुनकर महाराज कृष्णदेव राय को क्रोध आ गया वह आग बबूला होकर बोले:-” तेनालीराम को गिरफ्तार करके हमारे सामने पेश किया जाए”|

यह आदेश सुनकर तेलानीराम से नफरत करने वालों के चेहरे पर रौनक आ गई और वे मन ही मन भगवान से प्रार्थना करने लगे कि महाराज, तेलानीराम को कैद में डाल दें तो मजा आ जाएगा|

दूसरे दिन तेनालीराम (Tenali Raman) को बंदी बनाकर महाराज के समक्ष पेश किया गया| दरबार में सन्नाटा छाया हुआ था| तभी कड़क आवाज में महाराज ने तेनालीराम से पूछा:- “यह कड़वे नीम के पौधे को उपहार में भेजने का तुम्हारा क्या मतलब है”? क्या हम तुम्हें कड़वे नीम की तरह कड़वे लगते हैं?

यह सुनकर तेनालीराम (Tenali Raman) हैरान रह गए| वह समझ गया कि मेरे विरोधियों ने राजा को भड़काया है, परंतु तेलानी राम ने अपना धैर्य और विवेक नहीं खोया|

कुछ सोचकर तेनालीराम (Tenali Raman) बोला:- “महाराज! मेरा कोई ऐसा इरादा नहीं था जैसा आप सोच रहे हैं| मैंने तो आपको नीम का पौधा यह सोचकर भिजवाया था कि जिस तरह नीम के पेड़ की आयु अन्य वृक्षों की अपेक्षा लंबी होती है उसी तरह आप भी दीर्घायु हो”|

जिस तरह नीम के पौधे की सुगंध से मक्खी मच्छर दूर भागते हैं, उसी प्रकार आपके शत्रु आपकी वीरता के आगे नतमस्तक हो जाएं|

नीम के पेड़ के नीचे बैठने से गर्मी में भी शीतलता मिलती है उसी प्रकार किस राज्य में भी चारों और तरक्की, कुशलता, खुशहाली और सुख शांति चारों ओर फैल जाए| यही सब कामना करते हुए मैंने आपके लिए उपहार स्वरूप यह नीम का पौधा भिजवाया था|

तेनालीराम (Tenali Raman) की व्याख्या से महाराज खुश हो गए और तेनालीराम की प्रशंसा करने लगे| अंत में महाराज ने तेनालीराम को काफी इनाम देकर उसका स्वागत किया| यह सब देखकर तेनालीराम के विरोधियों के चेहरे पर मायूसी छा गई|


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