बीज और फसल


बीज और फसल

 

मथुरा के पास एक छोटे से गांव में एक किसान परिवार रहता था जो खेती-बाड़ी करके अपना जीवन यापन करता था| उस किसान का एक बेटा था जिसका नाम सोहन था| वह भी खेती बाड़ी में अपने पिताजी का साथ देता था| किसान परिवार हर वर्ष आलू की फसल उगाते थे|

 

पिताजी पूरा खेत जोतते थे| सोहन की मां और सोहन मिलकर पतली-पतली नालियों की कतार में बीज(seed) डालते थे और फिर उसके ऊपर खाद का मिश्रण डालते थे|खाद डालने के बाद उन नालियों को मिट्टी से भर दिया जाता था| लगातार देखभाल और सिंचाई करने के बाद वह बीज बड़े-बड़े आलू बन जाते थे|

आलू की खेती के दौरान सोहन के पिता ने सोहन को एक ज्ञान की बात बताई:-

सोहन तुमने देखा कि कैसे यह छोटा सा बीज कितनी जल्दी आलू बन जाता है| फिर आलू से हम तरह-तरह के भोजन बनाते हैं| कुछ इसी तरह से हमारे रिश्ते नाते भी पक कर तैयार होते हैं|

हमारा प्रत्येक emotion, हमारी प्रत्येक बात एक बीज की तरह होती है, जो समय के साथ परिपक्व होती जाती है और अलग-अलग परिस्थितियां उन बीजों के लिए खाद की तरह काम करती है|

 

पानी होता है ‘समय’|

इसका मतलब यह है कि आप जीवन में जो भी achieve करते हैं उनके बीज आप काफी पहले से ही अपने जीवन में बोते हैं|

आज के कर्मों के अनुसार ही हमें भविष्य में फल मिलता है|

हम सब का वर्तमान भी उस खेत की तरह ही है जो एक नई फसल उगाने के लिए एकदम तैयार है|

यदि आप आज अच्छा करेंगे, अच्छा खाद डालेंगे तो निश्चित रुप से फसल भी अच्छी होगी|

सीख:-

जैसा भी बीज हम अपने जीवन में बोते हैं, एक दिन वही फसल बनकर हमारे सामने आता है


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