Poem on River in Hindi | नदी पर कविता


इस कविता (Poem on River in Hindi) में कवि, नदी की प्रशंसा करते हुए यह बता रहे हैं कि किस प्रकार नदी मैदानी इलाकों में तेज वेग से बहती है और सारे कष्टों को सहती हुई अंत में सागर में समा जाती है और मानव जीवन के लिए वरदान साबित होती है |

Poem on River in Hindi – नदी पर कविता

नदी निकलती पर्वत से,

मैदानों में बहती है |

और अंत में मिल सागर से,

एक कहानी कहती है |

बचपन में छोटी थी पर,

बड़े वेग से बहती थी|

आंधी तूफां, बाढ़ बवंडर,

सब कुछ हंस कर सहती थी |

मैदानों में आकर मैने,

सेवा का संकल्प लिया |

और बना जैसे भी मुझसे,

    मानव का उपकार किया ||

डॉ० परशुराम शुक्ल


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