दुखों का निवारण


End of sadness(दुखों का निवारण)

 

इस संसार में सभी व्यक्ति किसी न किसी वजह से दुखी हैं| कोई ज्यादा दुखी है तो कोई थोड़ा दुखी है और यह स्वाभाविक भी है| परिस्थितियों पर हमारा कोई control नहीं है| कई बार अच्छा करते-करते भी और हमारे प्रयास विफल हो जाते हैं| लेकिन अधिकांश दुखों का कारण हम स्वयं ही हैं|


हमारे मन का अहंकार दूसरों की achievements को देख कर ईर्ष्या और क्रोध से भर जाता है| यदि मन की इच्छाएं पूरी ना हो तो हमारे जीवन में निराशा जन्म लेती है|

मनुष्य का जन्म माता पिता के सहयोग से हुआ है और पंच तत्वों से मिलकर यह शरीर बना है| इस शरीर में जीव का निवास परमपिता परमात्मा की कृपा से हुआ है| जीव के बिना यह शरीर निर्जीव है|

यह परमात्मा का हमारे ऊपर सबसे बड़ा उपकार है| हमें तो प्रत्येक सांस के लिए का हर पल उस मालिक का आभारी होना चाहिए कि उसने इतने सुंदर संसार को देखने का अवसर प्रदान किया है| जिस परमात्मा ने इस जीवन को दिया है वही इसका संरक्षण भी करेगा|

जैसे हम लोग अपने द्वारा बनाई गई कृतियों से प्यार करते हैं उनकी देखभाल करते हैं उसी तरह से परमात्मा भी हमारे जीवन को सुरक्षित रखता है|
मालिक ने इस संपूर्ण सृष्टि की रचना की है और उसे संभाल रहा है| इस सृष्टि के संचालन का सबसे मुख्य तत्व है ‘संतुलन’|

जन्म और मृत्यु आदि सभी एक निश्चित नियम से बंधे हुए हैं| हम लोग यदि अपने जीवन में संयम और संतुलन को importance दें तो हमारा जीवन भी आनंद से परिपूर्ण हो जाएगा| यदि हम अपने कार्यों को अच्छी भावनाओं के साथ करते रहें तो समय-समय पर कामयाबी अपने आप ही हमारा स्वागत करती रहेगी|

जीवन में दुख कम से कम हो यह हमारे ऊपर ही निर्भर करता है|


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