घमंडी घोड़ा और बकरा


एक बकरे की कहानी जो परोपकार के चक्कर में हलाल हो गया

एक राजा को जानवर बहुत प्रिय थे राजा ने अपने राज्य में हर प्रकार के जानवरों को इकट्ठा कर रखा था| उन जानवरों में एक बहुत ही खूबसूरत घोड़ा भी था| वह घोड़ा राजा का सबसे प्रिय जानवर था राजा जहां भी जाते थे उस  घोड़े की ही सवारी करते थे दिनभर राजा को अपनी पीठ पर लादे लादे उस बेचारे घोड़े की कमर टूट जाती थी|

 

हालांकि घोड़े की खातिरदारी भी जमकर होती थी अलग-अलग तरह के बढ़िया और जायकेदार पकवान उस घोड़े के लिए बनवाए जाते थे सभी जानवरों में उस घोड़े को सर्वश्रेष्ठ माना जाता था बड़े-बड़े हाथी भी घोड़े को झुक कर सलाम करते थे|

अब घोड़े को धीरे-धीरे घमंड होने लगा कि सब उसकी तारीफ करते हैं, क्योंकि वह सभी जानवरों में सबसे सुंदर है और मेरी सुंदरता के कारण राजा को सम्मान मिलता है| जिस दिन मैं नहीं रहूंगा तो राजा का सारा मान-सम्मान खत्म हो जाएगा|

लिहाजा घोड़े ने तय किया कि अब वह सिर्फ अपनी मनमर्जी चलाएगा| अगले दिन घोड़ा बीमार होकर बैठ गया सभी जानवरों ने उसे समझाया कि राजा के जाने का समय हो रहा है, लेकिन वह टस से मस नहीं हुआ|

राजा ने शाही वैद्य को बुलवाया वैद्य ने घोड़े को देखा और बोला, यह घोड़ा अब दौड़ने लायक नहीं रहा महाराज| अगर यह अगले 3 दिनों में उठकर खड़ा नहीं हुआ तो इसे मार देना ही अच्छा होगा|लेकिन घोड़ा अच्छी तरह समझता था कि राजा की जान उसी में बसी है इसलिए राजा उसे नहीं मारेंगे इस तरह 2 दिन बीत गए|

तीसरे दिन घोड़े के पास वाले तबेले में एक नया बकरा आया घोड़े को लगा कि यह बकरा तो मुझसे भी सुंदर है| कहीं यह बकरा मेरी जगह ना ले ले|

 

घोड़े ने अपनी कहानी उस बकरे को बताई घोड़े ने बकरे को बताया कि किस तरह उसने राजा की नजरों में अपनी इज्जत एकदम गिरा दी है|

बकरे ने घोड़े को सांत्वना दी और कहा मैं तुम्हारे लिए राजा से बात करूंगा| तभी राजा ने बकरे को बुलावा भेजा जब बकरा राजा के पास पहुंचा तो उसने राजा से घोड़े की खूब तारीफ की और बताया कि घोड़ा राजा को बेहद चाहता है| राजा यह सुनकर खुश हो गया और उन्होंने राज्य में शाही भोज का ऐलान कर दिया|

 

अगले दिन घोड़ा तो खुशी-खुशी वापस राजा की सवारी बन गया लेकिन बेचारा बकरा शाही भोज में पक गया|

सीख:-

अपने काम से काम न रखने पर कभी-कभी नुकसान भी उठाना पड़ जाता है


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