Surdas Ke Dohe | Surdas Poem in Hindi | सूरदास के पद

surdas ke dohe

Surdas Ke Dohe in Hindi सूरदास के पद Surdas Ke Dohe #1 उधौ मन न भये दस बीस एक हुतौ सो गयौ स्याम संग, को अवराधे ईस| इंद्री सिथिल भई केसव बिनु, ज्यौं देहि बिनु सीस| आसा लागि रहति तन स्वासा, जीवहिं कोटि बरीस| तुम तौ सखा स्याम सुन्दर के, सकल जोग के ईस| सूर हमारै नन्द-नंदन बिनु, और नहीं जगदीस| Surdas Ke Dohe #2 सखी री मुरली लीजै चोरि जिनी गोपाल कीन्है अपने बस, प्रीति सबनि की तोरि| छिन इक घर भीतर, निसि बासर, धरत न कबहुँ छोरि| कबहुँ…

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