1000 सोने की मोहरे | तेनालीराम का न्याय


तेनालीराम का न्याय – Tenali Rama Justice

tenali rama

Tenali Rama

विजयनगर राज्य में एक ब्राह्मण रहता था| उसने जीवन भर मेहनत करके 1000 स्वर्ण मुद्राएं इकट्ठा कर रखी थी| बुढ़ापे में ब्राह्मण के मन में चारों धाम की तीर्थ यात्रा करने की इच्छा जागृत हुई| वह स्वर्ण मुद्राओं को अपने साथ ले जाना नहीं चाहता था|

उसने इन स्वर्ण मुद्राओं को एक थैली में बंद करके अपने पड़ोसी राघव सेठ के पास जाकर बोला:-” सेठ जी! मैं चारों धाम की यात्रा पर जा रहा हूं| मेरे जीवन भर की कमाई इस थैली में बंद है| आप इस थैली को रख लें जब मैं तीर्थ यात्रा से वापस लौटे तो आप मुझे यह दे देना”|

सेठ जी बोले:-” तुम निश्चिंत होकर तीर्थयात्रा पर जाओ| तुम्हारी थैली मेरे पास सुरक्षित रहेगी| वापस आने पर तुम्हें यह थैली ज्यों की त्यों मिल जाएंगी”|

ब्राह्मण अपनी स्वर्ण मुद्राओं की थैली सेट राघव को सौंप कर तीर्थ यात्रा पर चला गया| सेठ जी इतने भले आदमी नहीं थे जितने अपने आप को भला मनुष्य दिखाने का प्रयास करते थे| ब्राह्मण के जाने के बाद सेठ जी ने उस थैली को खोलकर देखा तो उसमें एक हजार स्वर्ण मुद्राएं निकली| सेठ जी का मन बदल गया और सोचने लगे कि आई हुई लक्ष्मी को वापस करना बेवकूफी होगी|

उसने इन स्वर्ण मुद्राओं को खपाने का निश्चय कर लिया| थैली को खोलते समय उसमें एक छेद हो गया था सेठ ने उसका भी प्रबंध कर लिया| राघव सेठ ने एक दर्जी से वैसी ही थैली बनवाकर उसमें लोहे के सिक्के भर दिए और राघव सेठ उस बेचारे ब्राह्मण की 1000 स्वर्ण मुद्राएं डकार गया|

ब्राह्मण को तीर्थ यात्रा से लौटने में 3 वर्ष का समय लग गया| तीर्थ यात्रा से लौटने के बाद ब्राह्मण, सेठ राघव के पास गए और अपनी स्वर्ण मुद्राओं से भरी थैली मांगने लगे| सेठ राघव ने ब्राह्मण की खूब खातिरदारी की और उसकी थैली को वापस कर दिया|

ब्राह्मण खुशी-खुशी थैली लेकर अपने घर वापस आ गया| घर आकर उसने थैली को खोला तो उसमें स्वर्ण मुद्राओं की जगह लोहे के सिक्के निकले|ब्राह्मण उल्टे पांव सेठ राघव के पास जाकर बोला:- “सेठजी! मेरी थैली में 1000 स्वर्ण मुद्राएं थी लेकिन अब इसमें स्वर्ण मुद्राओं के स्थान पर लोहे के सिक्के हैं| मैंने तो आपका विश्वास करके अपनी थैली आपके पास रखी थी परंतु आपने मेरे साथ विश्वासघात किया है|

राघव सेठ आंखें लाल कर के कहने लगा:- “क्या उठ पटांग बातें कर रहे हो”?

‘मुझे क्या पता कि तुम्हारी थैली में क्या भरा हुआ है| तुम जैसी इसको रख गए थे वैसे ही मैंने इसको तुम्हें वापस कर दिया है’|
परंतु सेठ जी………..|

परंतु परंतु कुछ नहीं, यहां से चला जा वरना अपने आदमियों से कहकर धक्के मार कर तुम्हें बाहर निकलवा दूंगा|

गरीब ब्राह्मण ने सेठ राघव की शिकायत महाराज कृष्णदेव राय से की| वह बोला:- “महाराज, में तीर्थ यात्रा पर जाने से पहले सेठ राघव के पास अपने जीवन भर की कमाई 1000 स्वर्ण मुद्राओं की थैली अमानत के रूप में सेठ राघव के पास रख गया था| परंतु उसने मेरी थैली बदल कर लोहे के सिक्कों से भरी हुई वैसी ही थैली मुझे वापस कर दी|

गरीब ब्राह्मण की दुख भरी दास्तां सुनकर महाराज को सेठ राघव पर बड़ा क्रोध आया और उन्होंने इस मामले को सुलझाने का काम तेलानीराम को सौंप दिया|

तेनालीराम (Tenali Rama) बोला:-” महाराज! आप बिल्कुल भी चिंता ना करें| मैं शीघ्र ही दूध का दूध और पानी का पानी कर दूंगा”|

तेनालीराम (Tenali Rama) ने ब्राह्मण की थैली का बारीकी से निरीक्षण किया| उसकी समझ में सारी बात आ गई| तेनालीराम ने शहर के सभी दर्जियों को बुलावा भेजा और उनसे बोला:- “हम इस तरह की थैली बनवाना चाहते हैं, जिसकी थैली इस थैली से हुबहू मिल जाएगी उसे एक स्वर्ण मुद्रा पुरस्कार में मिलेगी”|

अगले दिन सभी दर्जियों ने 1-1 थैली बनाकर तेनालीराम के पास पहुंचा दी| सभी थैलियों का बारीकी से निरीक्षण करने पर पता चला कि सब थैलियों में कुछ न कुछ कमी रह गई थी, परंतु एक थैली ऐसी निकली जैसी थैली ब्राह्मण ने तेनालीराम को दी थी| उसमें कहीं भी कोई अंतर नहीं था|

इस थैली वाले दर्जी को बुलाकर तेनालीराम (Tenali Rama) ने पूछा:-” क्या तुम से ऐसी ही एक थैली सेठ राघव ने तुमसे बनवाई थी”? सच-सच बताना वरना फांसी पर लटका दिया जाएगा|

दर्जी ने सब सच-सच उगल दिया और कहा:- “आज से 3 वर्ष पहले सेठ राघव ने मुझसे ऐसी ही थैली बनवाई थी, जैसी थैली आपके हाथ में है”|
तेनालीराम ने उसी समय सेठ राघव को बुलवाया और उससे ब्राह्मण की 1000 स्वर्ण मुद्राएं के बारे में पूछताछ की| पहले तो राघव मुकर गया परंतु जब उसके सामने उस दर्जी को पेश किया गया तो सेठ की हालत खराब हो गई| राघव ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया|

तेलानी राम (Tenali Rama) राघव सेठ से बोले:- “अब तुम्हें 1000 स्वर्ण मुद्राओं के साथ धोखा देने के जुर्म में तुम पर 500 स्वर्ण मुद्राओं का और जुर्माना लिया जाएगा| इन 500 स्वर्ण मुद्राओं में से 400 मुद्राएं इस ब्राह्मण को दी जाएंगी और 100 स्वर्ण मुद्राएं पुरस्कार की राशि के रूप में दर्जी को मिलेगी|

इस प्रकार धोखेबाज राघव सेठ को 500 स्वर्ण मुद्राएं जुर्माने के तौर पर और देनी पड़ी तथा उसकी इज्जत को बट्टा लगा वह अलग से| तेनालीराम के इस न्याय से राजा कृष्णदेव राय बड़े प्रभावित हुए|


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One Thought to “1000 सोने की मोहरे | तेनालीराम का न्याय”

  1. Krishna

    Very meaningful story

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