Hindi Kavitayen


Best Hindi Kavitayen

Table of Contents

ये हम सभी जानते है कि हिंदी कविताये (Hindi Kavitayen) किंतनी मनमोहक और प्रेरणादायक होती है | वैसे तो बचपन में हम सभी ने बहुत अच्छी अच्छी कविताये पढ़ी होगी | लेकिन यहाँ जो कविताये मैं प्रस्तुत करने जा रहा हूँ, वे सभी आपको जीवन कि एक नई दिशा में ले जाएँगी जिनमे अलग अलग भाव व् रस (वीर रस , हास्य रस, करुणा रस ) है | इन कविताओं में जीवन को नए आयाम देती हुई प्रेरणादायक कवितायेँ है वही दूसरी और माँ के प्रति एक बच्चे कि भावना एवं बच्चे के प्रति माँ के वात्सल्य भाव को बहुत ही सुन्दर तरीके से दर्शाया गया है |

आईये मेरे प्यारे Readers पढ़ते है कुछ शानदार हिंदी कविताये (Hindi Kavitayen)

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Hindi Kavitayen

Poem on Nature in Hindi – प्रकृति पर आधारित सुंदर Hindi Kavitayen

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Poem on Nature in Hindi #1

चाहे बहे हवा मतवाली

चाहे बहे हवा लू वाली

फूल हमेशा मुस्काता

पत्तों की गोदी में रहकर

फूल हमेशा मुस्काता

कांटो की नोकों को सहकर

फूल हमेशा मुस्काता

ऊपर रह डाली पर खिलकर

फूल हमेशा मुस्काता

नीचे टपक धूल में मिल कर

फूल हमेशा मुस्काता

रोना नहीं फूल को आता

फूल हमेशा मुस्काता

इसलिए वह सबको भाता

फूल हमेशा मुस्काता |

Poem on Nature in Hindi #2

जब तपता है सारा अंबर

आग बरसती है धरती पर|

फैलाकर पत्तों का छाता

सब को सदा बचाते पेड़|

पंछी यहां बसेरा पाते

गीत सुना कर मन बहलाते|

वर्षा, आंधी, पानी में भी

सबका घर बन जाते पेड़|

इनके दम पर वर्षा होती

हरियाली है सपने बोती|

धरती के तन मन की शोभा

बनकर के इठलाते  पेड़|

जितने इन पर फल लग जाते

ये उतना नीचे झुक जाते|

औरों को सुख दे कर के भी

तनिक नहीं इतराते पेड़|

हमें बहुत ही भाते पेड़

काम सभी के आते पेड़|

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Poem on life in Hindi – जिंदगी पर आधारित Hindi kavitayen

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Poem on life in Hindi #1

जिंदगी की आपाधापी में कब हमारी उम्र निकली पता ही नहीं चला|

कंधे पर चढ़ने वाले बच्चे कब कंधे तक आ गए पता ही नहीं चला|

किराए के घर से शुरू हुआ सफर कब अपने घर तक आ गया पता ही नहीं चला|

साइकिल के पैडल मारते हुए हाँफते थे उस वक्त, कब गाड़ियों  में घूमने लगे, पता ही नहीं चला|

हरे भरे पेड़ों से भरे हुए जंगल थे तब, कब हुए कंक्रीट के पता ही नहीं चला|

कभी थे  जिम्मेदारी मां बाप की हम, कब बच्चों के लिए हुए जिम्मेदार हम पता ही नहीं चला|

एक दौर था जब दिन में भी बेखबर सो जाते थे कब रातों की नींद उड़ गई पता ही नहीं चला|

बनेंगे हम भी मां बाप यह सोचकर कटता नहीं था वक्त कब हमारे बच्चे बच्चों वाले हो गए पता ही नहीं चला|

जिन काले घने बालों पर इतराते थे हम कब उनको रंगना शुरू कर दिया पता ही नहीं चला|

दर दर भटकते थे नौकरी की खातिर कब रिटायर होने का समय आ गया पता ही नहीं चला|

बच्चों के लिए कमाने-बचाने में इतने मशगूल हुए हम, कब बच्चे हमसे हुए दूर पता ही नहीं चला|

भरे-पूरे परिवार में सीना चौड़ा रखते थे हम, कब परिवार हम दो पर ही सिमट गया पता ही नहीं चला|

Poem on life in Hindi #2

इस जीवन की चादर में सांसों के ताने बाने हैं,

दुख की थोड़ी सी सलवट है सुख के कुछ फूल सुहाने हैं,

क्यों सोचे आगे क्या होगा अब कल के कौन ठिकाने हैं,

ऊपर बैठा वो  बाजीगर जाने क्या मन में ठाने हैं|

चाहे जितना भी जतन करें भरने का दामन तारों से,

झोली में वही आएंगे जो तेरे नाम के दाने हैं|

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Poem on Mother in Hindi – माँ का प्यार

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Mothers Day Poem in Hindi #1

शब्द नहीं हैं कुछ मेरे पास,

बनाते हैं जो तुम्हे कुछ ख़ास|

इस धरा में कुछ भी नही है इतना पावन,

जितना मधुर मन तुम्हारे पास है मनभावन|

जिन परिस्थितियों का सामना कल तुम्हे करते देखा,

आज उसकी कसौटी पर खुद को खड़े देखा|

दिन रात हमे पालने में तुमने एक किया है,

आज हमने उन्ही दिनों को अलग और रातों को अलग किया है|

गंभीरता तुझमे पहाड़ों से कुछ ज़्यादा है,

गहराई तुझमे समुंद्र से कुछ ज़्यादा है,

ऊँचाई तुझमे अंबार से कुछ ज़्यादा है,

धैर्यता तुझमे पृथ्वी से कुछ ज़्यादा है|

सबको खुश रख कर तुमने आँसू पीये हैं,

हमे खुश रखने मे तुमने सब कुर्बान किया है|

धैर्यता का पाठ अभी तुमसे सीखना है,

शालीनता से रहना अभी तुमसे सीखना है|

कभी यह सोचता हूँ कि माँ बड़ी है या भगवान,

जवाब देने से डरता हूँ कहीं बुरा ना मान जायें भगवान|

Meri Maa Poem in Hindi #2

उससे धनी न यह संसार,

पास है जिसके माँ का प्यार |

झूठ मूठ गुस्साती वह,

झट प्रसन्न हो जाती वह |

दुखी देख सन्तानो को,

हंसकर गले लगाती वह |

अपने सारे कष्ट भुलाकर,

करती खुशियों की बौछार |

गोद में उसकी सुख आराम,

उससे बड़ा न कोई नाम |

उसके संस्कारो से मिलता है,

दुनिया में हमको सम्मान |

पूजनीय वह सारे जग की,

      माँ तुमको है बारम्बार प्रणाम ||

प्रभाष मिश्र 

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Poem on Father in Hindi – पिताजी को समर्पित हिंदी कविता

Poem on Water in Hindi – जल ही जीवन है

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Jal Par Kavita #1

जल है जीवन का आधार,

जल को न फेंको बेकार |

जल से ही सब जीवन पाते,

जल बिन जीवित न रह पाते |

जल(Jal) को क्यों फिर व्यर्थ बहाते,

बात सरल सी समझ न पाते |

बदल भाप अम्बर में जाता,

मेघो के घर में भर जाता |

वर्षा में धरती पर आता,

धरती से अम्बर तक जाता |

यही निरंतर चलता रहता,

यही जल चक्र कहलाता |

डॉ० अनामिका रिछारिया

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 Educational Kavitayen – शिक्षा के महत्व पर सुन्दर कविताये

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Poem on Education in Hindi #1

विद्या का मंदिर विद्यालय,

विद्या का धन देता है |

विद्या देकर बच्चो के यह,

अवगुण सब हर लेता है |

अच्छी अच्छी शिक्षाओ से,

ज्ञान विवेक बढ़ाता है|

 इसी ज्ञान के बल पर बच्चा,

 आगे बढ़ता जाता है |

डॉ०  परशुराम शुक्ल  

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Desh Bhakti Hindi Kavitayen – देशभक्ति पर आधारित सुन्दर कविताएँ

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Desh Bhakti Hindi Kavitayen #1

ओ! भारत के वीर सिपाही

कभी ना तुम घबराना

पर्वत नदिया और समंदर

पार सभी कर जाना

जब दुश्मन आता सीमा पर

उसको मार भगाते

फिर न लौटकर वापस आये

ऐसा सबक सिखाते

नहीं किसी से डरना सीखा,

ऐसे तुम मतवाले

गर्व करे तुम पर भारत माँ

भारत के रखवाले ||

डॉ० परशुराम शुक्ल


Desh Bhakti Hindi Kavitayen #2

अपने प्राणों से बढ़कर है प्यारा हमें तिरंगा

इसकी लहर लहर पावन है जैसी पावन गंगा|

तीन रंग की छाया में है

भारत देश के जागे

इसको उठता देख

फिरंगी गोरे दुश्मन भागे

इसकी शान में सब कुछ खोकर

इसका मान बढ़ाएं

जब भी समय पुकारे हमको,

इस पर शीश चढ़ाएं|

Poem on Patriotism in Hindi #3

तीन रंग से बना तिरंगा, लहर लहर लहराता है

नई शक्ति भरता तन मन में, नई चेतना लाता है

केसरिया रंग इसका हमको, बलिदानों की याद दिलाता|

मध्य भाग का धवल श्वेत रंग

विश्व शांति का पाठ पढ़ाता

हरा रंग विश्वास वीरता का संदेश सुनाता है

नई शक्ति भरता तन मन में, नई चेतना लाता है ||

डॉ० परशुराम शुक्ल

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Poem on Child in Hindi – बच्चे के प्रति माँ की भावना

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Poem on Child in Hindi #1

गुलाब सी कोमल देह है तेरी

नन्ही सी मुस्कान

आँखे मूँद कर जब तू सोये

लगे है सच में भगवान

लाल गुलाबी होंठ है तेरे

और उन पर मधुर मुस्कान

नन्ही नन्ही मुठ्ठिओं में जैसे

समाये हो सारा जहाँ

भूख लगे तो रोने लगता

पेट भरे तो हंसने लगता

तेरी क्रीड़ा पर मोहित होकर

मेरा जीवन है कुर्बान

दिन भर तुझे निहारा करती

फिर भी कभी ना आँखे भरती

हाथो में लेते ही तुझको

दूर हो जाती मेरी थकान

तेरे रूप पे मोहित होकर

मेरा जीवन है कुर्बान

कितना मासूम है चेहरा तेरा

जैसे हो साक्षात् भगवान ||

Poem on River in Hindi – नदी पर कविता

Poem on Moon in Hindi – चंदा मामा पर कविताएँ 

 

Poem on Moon in Hindi #1

दिन में सोते चंदा मामा,

रात निकल कर आते है |

अंधकार में भटक रहे जो,

उनको राह दिखाते है |

कभी दिखाई देते छोटे,

कभी बड़े हो जाते है |

कभी-कभी बदल में छुपते,

शायद वो शरमाते है |

कभी गोल दिखलाई देते,

कभी अर्ध बन जाते है |

हमको तो बस चंदा मामा,

सभी रूप में भाते है ||

अरुण श्रीवास्तव 

Poem on India in Hindi – भारतवर्ष के संदर्भ में  Kavitayen

Poem on India in Hindi #1

जिसको कहते भारत माता

वही हमारा देश

जिसे स्वर्ग भी शीश झुकाता|

वह है प्यारा देश

खड़ा हिमालय सीना ताने

सच्चे वीर समान

गंगा, गोदावरी, नर्मदा

करती गौरव गान

नहीं प्रलय से भी जो हारा

वही हमारा देश ||

भानुदत्त त्रिपाठी “मधुरेश”

Poem on India in Hindi #2

नन्हे मुन्ने बच्चे हम सब, भारत की संतान है|

हम भविष्य है प्रिय स्वदेश के, हम ही हिंदुस्तान है|

कोई भी नादान ना समझे, शेरों के संग खेलें है|

हाथ डालकर मुंह में उनके, गिनते दांत  अकेले है|

पवन पुत्र हम हनुमान है, लव कुश जैसे वीर हैं,

सौ योजन तक मार गिराऊँ, हम राघव के तीर है |

हम भारत के सिहं सूर है, रघुनन्दन श्री राम है |

हम भविष्य है प्रिय स्वदेश के,  हम ही हिंदुस्तान है ||

विष्णुगुप्त 

Independence Day Poem in Hindi – 15 अगस्त पर हिंदी कविताएं

Poem on Independence Day in Hindi #1

ये दिन शुभ 15 अगस्त है

गीत खुशी के गाओ

दुःख का सूरज हुआ अस्त है

गीत ख़ुशी के गाओ

कभी कारगिल कभी छम्ब में

कितनी लड़ी लड़ाई

हमने हर दुश्मन को अपने

देखो धुल चटाई

दुश्मन देखो पस्त पस्त है

गीत ख़ुशी के गाओ

मूल मंत्र हो मानव सेवा

जान गण मन हो प्यारा

मिटे देश के लिए तभी हो

जग में नाम हमारा

बच्चा बच्चा आज मस्त है

गीत ख़ुशी के गाओ ||

डॉ० अजेय जनमेजय


Poem on Independence Day in Hindi #2

पिंजरे के हर पंछी

छूट गगन में जाएंगे

जन्मदिवस आजादी का

आज हम मनाएंगे

पाने को आजादी सबने

कैसे जतन किए

भूल ना पाएं उन्हें

जिन्होंने हंसकर जहर पिए

कुर्बानी की ये  गाथाएं

फिर दोहराएंगे

सुख समृद्धि अहिंसा वाली

गंध हवाओं में

फर फर फहरे सदा तिरंगा

दसो दिशाओ में

बिलकुल सूरज के जैसे

भारत चमकाएंगे ||

डॉ० हरीश निगम

 Hindi Diwas Kavitayen – हिंदी दिवस पर आधारित कविताएं

Poem on Hindi Diwas  #1

भारत का हो मस्तक ऊंचा, जन जन की अभिलाषा है|

हम बच्चे हैं भारत मां के, हिंदी भारत भाषा है|

संस्कृत की पुत्री हिंदी,

बृज, अवधी की जननी हिंदी,

तमिल, तेलगु, मलयालम की ,

सगी बहिन सी लगती हिंदी |

   हिंदी का रस चख कर देखो, मीठा मधुर सुवासा है |

हम बच्चे है भारत माँ के, हिंदी भारत भाषा है |

एक करेगी सबको हिंदी,

नेक करेगी सबको हिंदी,

हिंदी को अपना कर देखो,

भली लगेगी सबको हिंदी |

हिंदी देवी सरस्वती है, हिंदी अपनी भाषा है |

   हम बच्चे है भारत माँ के, हिंदी भारत भाषा है |

आज बढ़ रहे रूस, चीन सब,

अपनी अपनी भाषा बल पर ,

हम भी हिंदी को अपना ले,

भेद भाव सब दूर भगाकर |

हिंदी बने विश्व की भाषा, यही एक अभिलाषा है|

      हम बच्चे है भारत माँ के, हिंदी(Hindi) भारत भाषा है ||

डॉ० परशुराम शुक्ल

Hindi Diwas Kavitayen #2

राष्ट्र हमारा भारत प्यारा,

हम बहु भाषा भाषी है |

अलग प्रान्त हो चाहे अपने,

पर हम भारत वासी है |

चाहे कोई बोले बंगला,

और असमिया, उड़िया जी,

तमिल, तेलगु, कन्नड़ चाहे,

बोले कुछ मलयालम जी |

अपनी गुजरती, पंजाबी,

 और मराठी, सिंधी है |

अलग अलग भाषाएँ कितनी ,

राष्ट्र की भाषा हिंदी है |

संस्कृत भाषा सबकी जननी,

सब भाषाएँ बहने है |

एक दूजे की शोभा है ये,

भारत माँ के गहने है |

आओ सारे भारतवासी,

जन जन तक हिंदी पहुंचाए|

सीखे हिंदी और सिखाये,

सदा राष्ट्र की शान बढ़ाये ||

डॉ० शकुंतला कालरा

Funny Hindi Kaviteyen – मजेदार हिंदी कविताएँ

Funny Poems in Hindi #1

भालू की माँ बोली कालू

आ तुझको नहला दूँ |

लगा लगाकर साबुन बेटा ,

सारा मैल छुड़ा दूँ |

भागा भालू ज्यों ही माँ ने,

डाला ठंडा पानी ,

लगा चीखने जोर जोर से,

याद आ गयी नानी |

Funny Hindi Kavitayen #2

बन्दर मामा बी.ए पास

दुल्हन लाये एम. ए. पास |

मामा बोले – घूंघट कर,

ममी बोली – मुझसे डर |

मै लड़की हूँ एम. ए. पास,

मेने खोदी नहीं है घास |

फिल्म देखने जाउंगी,

रोटी नहीं बनाउंगी |

बन्दर बोला – क्यों-क्यों-क्यों,

बंदरिया बोली – खों खों खों ||

संतोष कुवंर 

Funny  Hindi Kavitayen #3

अरे अरे क्या करती बकरी,

घास परायी चरती बकरी |

बकरी बकरी उधर ना जा ,

इधर चली आ , आ , आ , आ ,

वहीँ पकड़ ली जाएगी,

मै मै मै चिल्लायेगी ||

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Poems for Kids in Hindi – बच्चो के लिए प्रेरणादायक एवं शिक्षाप्रद कविताएँ

Hindi Poems For Class 8 #1

भूख गरीबी लाचारी को,

इस धरती से आज मिटाये |

भारत के भारतवासी को ,

उनके सब अधिकार दिलाये |

रहे ना कोई आज निरक्षर,

ऐसी नई चेतना लाये |

जाति-धर्म के भेद भूलाकर

सबको अपने गले लगाए |

सत्य न्याय के पथ पर चलकर,

कुछ अभिनव आदर्श बनाये|

अपने आदर्शो के बल पर

एक नया विश्वास जगाये|

भारत के सब भारतवासी,

प्रगति मार्ग पर बढ़ते जाये |

जिस पर गर्व करे जग सारा,

ऐसा भारतवर्ष बनाएं ||

Poems in Hindi For kids #2

धरती माँ ने जन्म दिया है, धरती माँ ने पाला है |

किन्तु हाय हमने धरती का, सर्वनाश कर डाला है |

जिन वृक्षो ने धरती माँ के, गहरे जख्मो को पाटा|

बड़े बेरहम होकर हमने, ऐसे वृक्षो को काटा |

आंधी, तूफां, बाढ़, बवंडर, इसे नष्ट कर जायेंगे |

नष्ट अगर धरती होगी तो, हम सब भी मिट जायेंगे ||

Best Hindi Poem for Kids #3

बच्चो अपनी राह बनाओ,

राह बनाकर चलते जाओ |

मंजिल अपने आप मिलेगी,

द्रढ़ प्रतिज्ञ हो कदम बढ़ाओ|

तूफानों से मत घबराओ,

आये कितनी भी बाधाएं,

हिम्मत करके बढ़ते जाओ |

हिम्मत, साहस और लगन से,

जो चाहो सो बन सकते हो |

अपने साथ दूसरो के भी,

जीवन में रस भर सकते हो |

मानव जीवन सर्वश्रेष्ठ है,

इसे न यूँ ही व्यर्थ गवाओ,

कुछ भी बनो, मगर कुछ बनकर,

मानव जीवन सफल बनाओ ||

Hindi Poems  For Class 8 #4

फूले से नित हंसना सीखो,

भौरो से नित गाना |

तरु की झुकी डालियो से,

नित सीखो शीश झुकाना |

सीख हवा के झौकों से लो,

हिलना, जगत हिलाना |

दूध और पानी से सीखो,

मिलना और मिलाना |

सूरज की किरणों से सीखो,

जगना और जगाना |

लता और पेड़ो से सीखो,

सबको गले लगाना |

मछली से सीखो स्वदेश के,

लिए तड़प कर मरना |

पतझड़ के पेड़ो से सीखो,

दुःख में धीरज रखना |

पृथ्वी से सीखो प्राणी की,

सच्ची सेवा करना |

दीपक से सीखो जितना,

हो सके अँधेरा हरना |

जल धारा से सीखो,

जीवन पथ में बढ़ना |

और धुए से सीखो हरदम,

          ऊंचाई पर ही चढ़ना ||

Poem on Books In Hindi – किताबों पर आधारित सुंदर कविताएं

Poem On Birds In Hindi – पक्षियों पर हिंदी कविताएं

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Poem On Birds In Hindi #1

प्रात: होते ही चिड़िया रानी, बगिया में आ जाती,

चूं चूं करके शोर मचाकर बिस्तर में मुझे जगाती |

तिलगोजे  जैसी चोंच है उसकी,

मोती जैसी आंखें |

छोटे छोटे पंजे उसके

रेशम जैसी आंखें |

मीठे मीठे गीत सुनाकर,

तू सबका मन बहलाती |

छोटे छोटे दाने चुग कर

बड़े चाव से खाती |

चारो तरफ फुदक फुदक कर,

तू अपना नाच दिखाती |

नन्हे नन्हे तिनके चुनकर,

तू अपना घोंसला बनाती |

रात होते ही झट से

तू घोंसले में घुस जाती |

पेड़ो की शाखाओ में तू,

अपना बास बनाती |

Inspirational Poem in Hindi – प्रेरणादायक कविता 

क्या कहा, कठिन है काम, कभी ऐसा मत बोलो तुम |

कर सकते हो हर काम, शक्ति अपनी तो तोलो तुम |

यदि आसान है काम, भला उसका फिर करना क्या ,

जिसको मंजिल तक जाना है, उसको फिर डरना क्या |

श्रम करते ही रहने से हर मुश्किल हल होती है,

डूबे बिन सागर तल में, मिलता किसको मोती है |

कायर ही कठिनाई का रोना ले रुक जाते है,

वीरों के चरणों पर आकर, पर्वत झुक जाते है ||

रामेश्वर दयाल

Inspirational Poems in Hindi #2

मै नन्हा सा अंकुर मुझको, 

सूरज पाना है |

आंधी, पानी, तेज हवाएं,

शीत लहर तूफानी |

जाना मुझको दूर बहुत है,

राह बड़ी अनजानी |

चारो तरफ बवंडर फिर भी, जड़े जमाना है |

मै नन्हा सा अंकुर मुझको, सूरज पाना है |

फूल हमेशा कभी खिले,

बस एक बार ही खिलता है |

यह जीवन ऐसा जीवन,

जो एक बार ही मिलता है |

इस छोटे से जीवन में,

कुछ कर दिखलाना है|

मैं नन्हा सा अंकुर,

मुझको सूरज पाना है ||

राजा चौरसिया 

Motivational Poems in Hindi #3

सीख 

धरती से सीखा है हमने , सबका बोझ उठाना |

और गगन से सीखा हमने, ऊपर उठते जाना |

सूरज की लाली से सीखा, जग आलोकित करना |

चंदा की किरणों से सीखा, सबकी पीड़ा हरना |

शेरो से सीखा है हमने, अपनी रक्षा करना |

और शहीदों ने सिखलाया हँसते हँसते मरना ||

 

Desh Bhakti Kavitayen – देशभक्ति कविता 

desh bhakti kavitayen

तुमको अपनी मां प्यारी है,

मां को भी तुम प्यारे हो|

उसके दिल के टुकड़े हो तुम,

सूरज चांद सितारे हो|

पर मां से भी बढ़कर है जो,

मातृभूमि है वह प्यारी|

उन दोनों का कर्ज चुकाने,

की तुम पर जिम्मेदारी|

तुम्हें बड़ा करने में दोनों,

की ही बड़ी भूमिका है,

दूजा हक़ तुम पर माँ का,

पर पहला मातृभूमि का है ||

उषा यादव 

Poem on Daughter in Hindi – बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ 


सचमुच धरती का सारा धन,

है ये अपनी बेटियाँ

ब्रह्मा की सुन्दरतम रचना,

 है ये अपनी बेटियाँ |

सभी काम में सबसे आगे,

अपनी प्यारी बेटियाँ

चंदा सी शीतलता देती,

बंद हवा सी पेटिया|

ये वैभव का खुला खज़ाना,

गृह लक्ष्मी है बेटियाँ

ओ पापी ! मत मार भ्रूण में,

ये किलकारी बेटियाँ |

डॉ० जगदीश शरण

Poem on Environment in Hindi – इस प्रदुषण से हमें बचाओ 

पर्यावरण किसे कहते है ?

आओ हम सब इसको जाने |

पर्यावरण प्रदुषण के सब,

खतरों को पहले पहचाने |

जो है चारो तरफ हमारे,

पर्यावरण उसे कहते है |

ध्वनि, जल, मिटटी, वायु सब,

इसके अंतर्गत रहते है ||

Poem on Environment in Hindi #2

मेरे मिट जाने पर, कैसे जल बरसाओगे ?

सूख गए यदि खेत तुम्हारे,

बोलो फिर क्या खाओगे |

भूख प्यास पीड़ित मानवता,

छोड़ अगर तुम जाओगे |

मरकर अपने पूज्य पिता को,

कैसे मुँह दिखलाओगे ||

Poem on Child Labour in Hindi – बाल श्रम पर कविता

निर्धनता की देन है, ये बालक मजदूर,

दुःख ही दुःख इनको मिले, सुख से कोसो दूर,

फ़ाक़ाकश है जिंदगी, बचपन का अभिशाप,

काम ढूंढ़ते फिर रहे, करते करुण विलाप |

ये गुलाब के फूल है, इनमे गंध अपार,

फिरते कटी पतंग से, अजब पेट की मार |

कोल्हू के बैलो समान, करते है ये काम,

नहीं रात में नींद है, दिन को न आराम |

स्टेशन पर ट्रैन में, फिरते हाथ पसार,

रूखा सूखा जो मिले, करते विवश आहार |

नहीं पेट भर अन्न है, तन के लिए न वस्त्र,

भिखमंगे बनकर रहे, निशदिन होते त्रस्त |

होटल में या मीलों में, मिल जाते कुछ काम,

मलिन मानसिकता लिए, पा जाते कुछ दाम |

धरती इनका बिछोना, छप्पर है आकाश,

खाते सबकी गालियां, फिरते बने उदास |

बुनियादी जो हक़ है, देता इनको कौन,

नियम बना कर के बड़े, हो जाते है मौन |

अवसर यदि इनको मिले, होगा सही विकास,

     पढ़ लिख कर जीवन सुखद, बना सकेंगे आप ||

अवधकिशोर सक्सेना 

यदि वास्तव में आपको इन कविताओं से जीवन में सीख मिलती है तो कृपया इन्हे शेयर करना न भूले और इन कविताओं के बारे में आपके विचार या सुझाव हमें कमेंट करके जरूर बताएं |


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